रांची, 27 अगस्त। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब कोचिंग संस्थानों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े मामले में रांची और हजारीबाग के कुछ कोचिंग संचालकों के परिसरों पर हुई छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका की जांच
सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि क्या किसी कोचिंग संस्थान या उससे जुड़े लोगों के माध्यम से अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित तरीके से परीक्षा या साक्षात्कार में फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसी कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों और कोचिंग संचालकों के बीच संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
साक्षात्कार में सफलता के लिए 15 लाख रुपये लेने का आरोप
जांच के दौरान सामने आए दावों के अनुसार, टीडीपीएल से जुड़े मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार में सफलता दिलाने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी करीब 15 लाख रुपये लिए गए थे। हालांकि, इन आरोपों और बयानों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
कई लोगों के कथित कनेक्शन की पड़ताल
मामले में पूर्व JPSC पदाधिकारियों, टीडीपीएल से जुड़े लोगों और कुछ कोचिंग संचालकों के नाम जांच के दायरे में आए हैं। जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगा रही है कि अभ्यर्थियों, बिचौलियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बीच किसी तरह का संगठित नेटवर्क मौजूद था या नहीं।
दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से जोड़ी जा रहीं कड़ियां
छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों, संपर्क विवरण और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। सीबीआई कथित लेनदेन और संपर्कों से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी का फोकस इस बात पर भी है कि कथित तौर पर पैसे के बदले साक्षात्कार या नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करने का कोई नेटवर्क सक्रिय था या नहीं।
मामले में जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एजेंसी की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।




