रांची, 30 जुलाई 2026: भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन गुरुवार से शुरू हो गया। पूरे माह श्रद्धालु व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के माध्यम से भोलेनाथ की उपासना करेंगे। इस वर्ष सावन में चार सोमवारी पड़ रही हैं। सावन की शुरुआत के साथ ही राजधानी रांची समेत राज्यभर के प्रमुख शिवालयों में विशेष तैयारियां की गई हैं। इसके साथ ही आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है।
शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी
सावन के पहले दिन मंदिरों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं ने पूजा सामग्री, बेलपत्र, फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी भी की। बाजारों में बुधवार से ही अच्छी खासी रौनक देखने को मिली।
पहाड़ी मंदिर में सुबह 4:30 बजे से जलाभिषेक
रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक श्रद्धालु जलाभिषेक कर सकेंगे। इसके बाद दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन और पूजा जारी रहेगी। शाम 7:30 बजे संध्या आरती और विशेष श्रृंगार के बाद श्रद्धालु श्रृंगार दर्शन कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन सतर्क
श्रावण मास के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए नगर निगम ने मंदिर परिसर और आसपास विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मेयर और डिप्टी मेयर ने पहाड़ी मंदिर क्षेत्र का निरीक्षण कर तीन शिफ्ट में सफाई, पर्याप्त रोशनी, पेयजल टैंकर और चलंत शौचालय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सावन में क्यों बदला जाता है खान-पान?
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी सावन में सात्विक भोजन का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहता है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन करने की सलाह दी जाती है। इसी कारण कई लोग इस महीने प्याज, लहसुन और मांसाहार से परहेज कर फल, दूध, दही और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं।
हरे रंग का धार्मिक महत्व
सावन का महीना हरियाली और प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरा रंग समृद्धि, सौभाग्य और माता पार्वती से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि इस महीने महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं और मेहंदी लगाकर उत्सव मनाती हैं।
28 अगस्त को होगा श्रावणी मेले का समापन
इस वर्ष श्रावणी मेला 28 अगस्त तक चलेगा। पूरे सावन माह शिवालयों में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।




