नई दिल्ली/रांची, 24 अगस्त। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को JPSC Combined Civil Services Preliminary Competitive Examination-2025 में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए CBI या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है।

परीक्षा रद्द करने की नहीं, स्वतंत्र जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का मुख्य जोर परीक्षा रद्द कराने के बजाय कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच पर है। याचिकाकर्ता की ओर से CBI जांच या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच का विकल्प रखा गया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगकर मामले को आगे की सुनवाई के लिए खुला रखा है।

19 अप्रैल 2026 को हुई थी प्रारंभिक परीक्षा

याचिका में झारखंड लोक सेवा आयोग की 2025 संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान परीक्षा की ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दे सामने रखे गए।

JPSC-JSSC विवाद के बीच बढ़ी कानूनी हलचल

यह सुनवाई ऐसे समय हुई है जब झारखंड में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से विवाद और छात्र आंदोलन चल रहा है। राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं के आधार पर कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसमें JSSC-CGL और JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत कई परीक्षाएं शामिल थीं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कुछ भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई थी। 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा से हुई नियुक्तियों को लेकर भी अभ्यर्थियों को राहत मिली है। JSSC-CGL रद्द करने के फैसले पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगाई है।

अब सरकारों के जवाब पर टिकी नजर

सुप्रीम कोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद अब केंद्र और झारखंड सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल नोटिस जारी होना परीक्षा रद्द करने का आदेश नहीं है। अदालत आगे यह तय करेगी कि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच की जरूरत है या नहीं। इस मामले ने झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई को और महत्वपूर्ण बना दिया है।