नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने और अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोपी एक लॉ स्टूडेंट को दिल्ली की निचली अदालत से जमानत मिल गई है। अदालत ने कहा है कि न्यायालय की गरिमा किसी एक व्यक्ति के अनुचित व्यवहार से प्रभावित नहीं हो सकती, लेकिन ऐसे आचरण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
₹25,000 के बेल बॉन्ड पर मिली जमानत
दिल्ली की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपी प्रबल प्रताप सिंह (24) को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। निचली अदालत ने उम्मीद जताई कि भविष्य में आरोपी न्यायालय की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करेगा।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप सिंह ने कथित तौर पर:
- मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
- कोर्ट रूम में कागजात फेंके।
- कार्यवाही में बाधा पहुंचाई।
- सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की की।
इस मामले में एक अन्य कानून छात्र को भी गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी का व्यवहार निंदनीय है और इसे किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि:
- मामले की जांच पूरी हो चुकी है।
- हिरासत में पूछताछ की अब आवश्यकता नहीं है।
- आरोपित अपराध में अधिकतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देना उचित माना गया।
सुप्रीम कोर्ट के संयम का भी किया उल्लेख
निचली अदालत ने कहा कि घटना के समय सुप्रीम कोर्ट ने भी अत्यंत संयम का परिचय दिया और आरोपी के व्यवहार के बावजूद तत्काल कठोर कार्रवाई का रास्ता नहीं अपनाया। ऐसे में जमानत पर फैसला केवल कानूनी सिद्धांतों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि भावनात्मक प्रतिक्रिया के आधार पर।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने के आरोपी लॉ स्टूडेंट को मिली जमानत।
- CJI के खिलाफ कथित अपशब्द और कोर्ट रूम में अव्यवस्था फैलाने का आरोप।
- दिल्ली की अदालत ने 25,000 रुपये के बेल बॉन्ड पर दी राहत।
- कोर्ट ने कहा—अदालत की गरिमा सर्वोपरि है, लेकिन जमानत कानूनी सिद्धांतों के आधार पर तय होगी।




