नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर भारत में अमेरिकी दूतावास दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और बढ़ते आर्थिक सहयोग की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सीनेट में ऐसा विधेयक आगे बढ़ा है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। इस संभावित कदम को लेकर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने अमेरिकी नीति पर सवाल उठाते हुए इसे दोहरा रवैया बताया है।
एक तरफ साझेदारी की बात, दूसरी तरफ टैरिफ की आशंका
बुधवार को भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी दोनों देशों के लिए समृद्धि और नए अवसर लेकर आ रही है। पोस्ट में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का बयान भी साझा किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
सीनेट में आगे बढ़ा नया विधेयक
इसी बीच अमेरिकी सीनेट ने एक ऐसे विधेयक को प्रक्रियात्मक मंजूरी दी है, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन रूस से तेल आयात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह विधेयक सीनेट में आगे की प्रक्रिया से गुजर रहा है और आने वाले समय में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है।
कंवल सिब्बल ने उठाए सवाल
पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक कंवल सिब्बल ने अमेरिकी दूतावास की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि यदि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी इतनी मजबूत है, तो फिर भारत पर 100% टैरिफ लगाने जैसी बात क्यों की जा रही है। उनका कहना था कि यदि ऐसा कदम उठाया जाता है तो इससे दोनों देशों के संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित प्रावधान लागू होता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह विधेयक कानून नहीं बना है और अंतिम निर्णय अमेरिकी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ को लेकर दोनों देशों की आगामी रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।




