नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026
संसद ने 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा से पारित होने के एक दिन बाद गुरुवार को यह विधेयक लोकसभा से भी ध्वनिमत से पारित हो गया। नए कानून के तहत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करना या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। लोकसभा में यह विधेयक विपक्षी दलों, विशेषकर द्रमुक (DMK), के विरोध और नारेबाजी के बीच पारित हुआ। विपक्ष ने विधेयक पर आपत्ति जताई, जबकि सरकार ने इसे राष्ट्र सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।
सरकार ने बताया राष्ट्र गौरव से जुड़ा कानून
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को वही सम्मान मिलेगा जो राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी व्यक्ति, राज्य या विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।
विपक्ष ने जताया विरोध
द्रमुक सांसद के. कनिमोई और ए. राजा समेत कई विपक्षी नेताओं ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद किसी पर थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने इसे संघीय ढांचे और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सदन में हंगामे के बीच विधेयक पारित किए जाने पर भी सवाल उठाए।
बीजेपी ने किया पलटवार
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम्' देश की अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस वक्तव्य का भी उल्लेख किया, जिसमें 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' को समान सम्मान देने की बात कही गई थी।
क्या हैं नए कानून के प्रमुख प्रावधान?
विधेयक के अनुसार, किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या सभा में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन में जानबूझकर बाधा डालना, उसका अपमान करना या गायन रोकने का प्रयास करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रगीत को कानूनी संरक्षण प्रदान करना और उसके सम्मान को सुनिश्चित करना है।




