नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026
भारत की राजधानी नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit 2026 की मेजबानी के लिए तैयार है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक मंच पर आने की संभावना है। सम्मेलन को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पश्चिम एशिया के हालात, ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
करीब पांच साल बाद भारत में आयोजित हो रहे इस शिखर सम्मेलन में कई सदस्य और आमंत्रित देशों के शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं। यदि शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। ऐसे में भारत-चीन संबंधों और सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
सम्मेलन में इन मुद्दों पर रहेगा खास फोकस
सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद, फिलिस्तीन मुद्दे पर BRICS देशों का साझा रुख और चाबहार पोर्ट परियोजना की प्रगति पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा क्षेत्रीय कूटनीति को मजबूत करने और दक्षिण एशिया में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।
बांग्लादेश और पड़ोसी देशों पर भी नजर
भारत ने सम्मेलन में कुछ गैर-सदस्य देशों को भी विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इनमें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इससे दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत की भूमिका होगी अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत केवल मेजबान की भूमिका में नहीं होगा, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मध्यस्थ की भूमिका भी निभा सकता है। खासकर पश्चिम एशिया के हालात और BRICS देशों के बीच सहमति बनाने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वैश्विक कूटनीति पर रहेगा दुनिया का ध्यान
BRICS Summit 2026 को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, नवाचार, सतत विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। नई दिल्ली में होने वाला यह आयोजन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी रेखांकित करेगा।




