लखनऊ | 15 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कासमंडी गांव इन दिनों एक ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद को लेकर चर्चा में है। यहां मौजूद एक प्राचीन किले, मस्जिद और कब्रिस्तान को लेकर दो समुदायों के अलग-अलग दावे सामने आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। एक पक्ष का कहना है कि यह स्थल महाराजा कंस पासी के ऐतिहासिक किले और पूजा स्थल का हिस्सा था, जबकि दूसरा पक्ष इसे वर्षों पुरानी मस्जिद और कब्रिस्तान बताकर अपने धार्मिक अधिकार का दावा कर रहा है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

पासी समाज ने ऐतिहासिक विरासत का किया दावा

पासी समाज का कहना है कि कासमंडी क्षेत्र कभी महाराजा कंस पासी के शासन का प्रमुख केंद्र था। समाज के अनुसार यहां एक विशाल किला मौजूद था और यह स्थान धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता था। समाज का आरोप है कि समय के साथ इस ऐतिहासिक स्थल पर अतिक्रमण हुआ और बाद में यहां मस्जिद तथा कब्रिस्तान विकसित कर दिए गए। समाज अपने दावे के समर्थन में स्थानीय परंपराओं, लोककथाओं और कुछ ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला दे रहा है।

कौन थे महाराजा कंस पासी?

पासी समाज की मान्यता के अनुसार महाराजा कंस पासी अवध क्षेत्र के प्रभावशाली शासकों में शामिल थे। बताया जाता है कि उनका शासन लगभग वर्ष 980 से 1031 ईस्वी के बीच रहा और उनका प्रभाव मलिहाबाद, काकोरी, उन्नाव, हरदोई तथा आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ था। लोककथाओं में उन्हें एक वीर योद्धा और क्षेत्रीय शासक के रूप में याद किया जाता है।

मुस्लिम पक्ष ने दावों को बताया निराधार

दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि संबंधित स्थल कई पीढ़ियों से मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में उपयोग में है। उनका दावा है कि यहां लंबे समय से नियमित रूप से नमाज अदा की जाती रही है और इसका धार्मिक स्वरूप ऐतिहासिक रूप से स्थापित है। ऐसे में किसी अन्य ऐतिहासिक दावे के आधार पर इसकी पहचान बदलने का कोई औचित्य नहीं है।

प्रशासन कर रहा है पूरे मामले की निगरानी

दोनों पक्षों के दावों के बीच प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह के सामाजिक तनाव को रोकने पर है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही सामने आएगा।