नई दिल्ली | 14 जुलाई 2026

दिल्ली की तिहाड़ जेल एक बार फिर अपने भोजन को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक की याचिका के बाद चर्चा में आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक मामले में न्यायिक हिरासत में बंद वैनडाइक ने अदालत में दावा किया है कि तिहाड़ जेल का मसालेदार और तैलीय भोजन उनके स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है। उनका कहना है कि पिछले करीब 50 दिनों से वे सामान्य भोजन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनका लगभग 14 किलोग्राम वजन कम हो गया है।

खुद खाना बनाने की मांगी अनुमति

याचिका में वैनडाइक ने जेल के भीतर इंडक्शन स्टोव, बर्तन और सीमित रसोई सामग्री रखने की अनुमति मांगी है। उन्होंने दाल, चावल, ब्रेड, सब्जियां, दूध, सोया मिल्क, चिकन, मछली और अन्य सामान्य खाद्य पदार्थों से अपना भोजन स्वयं तैयार करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। अदालत ने इस मामले में तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

तिहाड़ जेल में कैदियों को क्या खाना मिलता है?

दिल्ली जेल मैनुअल के अनुसार कैदियों को प्रतिदिन तीन समय भोजन दिया जाता है। सुबह रोटी, दाल, सब्जी और चाय, दोपहर में चना व चाय तथा शाम को रोटी, दाल और सब्जी परोसी जाती है। भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दिल्ली जेल प्रशासन तय करता है तथा महिला, पुरुष, श्रमिक और विशेष श्रेणी के कैदियों के लिए अलग-अलग डाइट स्केल निर्धारित हैं।

दुनिया की जेलों का खाना भी अलग-अलग

विशेषज्ञों के अनुसार हर देश की जेलों में भोजन स्थानीय खानपान, पोषण मानकों और जेल नियमों के अनुसार तय किया जाता है। कई देशों में स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों वाले कैदियों के लिए अलग भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध होती है। ऐसे में तिहाड़ जेल का यह मामला एक बार फिर जेलों में भोजन की गुणवत्ता और कैदियों के स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।