धर्म | 14 जुलाई 2026
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि बुधवार, 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि को तंत्र साधना, शक्ति उपासना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि की साधना गोपनीय रूप से करने का विशेष महत्व बताया गया है।
इस शुभ मुहूर्त में करें घटस्थापना
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे तक रहेगा। वहीं पुष्य नक्षत्र और हर्षण योग का विशेष संयोग सुबह करीब 8:02 बजे बनेगा, जिसे साधना आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
गुप्त नवरात्रि में क्या करें?
इन नौ दिनों में मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करें, दोनों समय आरती करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। यदि व्रत या मंत्र जाप कर रहे हैं तो उसे गोपनीय रखें। घर में कलश स्थापना या अखंड ज्योति जलाई है तो घर को खाली न छोड़ें। मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना भी इस दौरान विशेष महत्व रखता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
गुप्त नवरात्रि में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। पूजा में तुलसी, दूर्वा, आक और मदार के फूल अर्पित करने से बचें। साथ ही क्रोध, विवाद, निंदा और अपशब्दों से दूर रहें। पूजा या व्रत के समय चमड़े की वस्तुओं का उपयोग भी वर्जित माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नियमों का श्रद्धा और अनुशासन के साथ पालन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा साधक को आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।




