नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े मामले में एक बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा है कि ₹8 लाख रुपये सालाना आय सीमा पहली नजर में उचित प्रतीत होती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है और मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
2021 से लंबित है मामला
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने 2021 में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इस याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए OBC को 27 प्रतिशत और EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था।
क्या बोला सुप्रीम कोर्ट ?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ₹8 लाख वार्षिक आय की सीमा पहली नजर में उचित दिखाई देती है। हालांकि यह केवल प्रारंभिक टिप्पणी है और इसे अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जाएगा।
पीठ ने यह भी कहा कि यह मामला 2021-22 के NEET प्रवेश से जुड़ा था, जिसकी प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद आय सीमा की वैधता का प्रश्न अब भी विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता ने क्या उठाया सवाल?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि ₹8 लाख आय सीमा का मुद्दा अब भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति ने इस सीमा को बरकरार रखने की सिफारिश की थी, लेकिन पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि रखने वाले परिवारों को EWS श्रेणी से बाहर रखने की बात कही थी। केंद्र सरकार ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ₹8 लाख आय सीमा की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। अदालत ने याचिकाकर्ता से सभी कानूनी मुद्दों की विस्तृत सूची दाखिल करने को कहा और मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी इस मामले में सहायता मांगी है।
2022 में 103 वें संविधान संशोधन को मिल चुकी है मंजूरी
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2022 में 103वें संविधान संशोधन को वैध ठहराते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण को संवैधानिक मान्यता दी थी। हालांकि ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा की वैधता का मुद्दा अलग याचिकाओं में अभी भी न्यायिक विचाराधीन है।
क्या है इस टिप्पणी का मतलब?
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल प्रथम दृष्टया (Prima Facie) राय है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने ₹8 लाख आय सीमा को अंतिम रूप से वैध घोषित कर दिया है। इस मामले में अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद ही आएगा।




