वॉशिंगटन डीसी, 4 नवंबर 2026 : अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों- सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए अपने बचे हुए दो साल का कार्यकाल आसान नहीं रहने वाला है। वहीं, मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने सीनेट चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है।
ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में हार
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुए हैं। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए थे। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी को 231 सीटें मिली हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी 144 सीटों पर आगे या जीत दर्ज कर पाई है। बाद के अनुमानों में डेमोक्रेट्स को 252 से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं, सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए। सामने आए नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीतीं। दो सीटों पर मतगणना जारी रहने के दौरान डेमोक्रेट्स के पास कुल 54 और रिपब्लिकन के पास 44 सीटें बताई गईं। सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है, जबकि हाउस में 218 सीटें बहुमत का आंकड़ा है।
अब्दुल अल-सैयद बने चर्चा का केंद्र, ट्रम्प ने कहा था 'जिहादी'
मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद की जीत भी इन चुनावों की सबसे चर्चित खबरों में शामिल रही। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम बताया जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब्दुल अल-सैयद पर तीखे हमले किए थे। 25 अक्टूबर को मिशिगन की एक चुनावी रैली में ट्रम्प ने उन्हें 'जिहादी' और मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बताया था। ट्रम्प ने कहा था कि वह अल-सैयद को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने उन पर आतंकवादियों का समर्थन करने के आरोप भी लगाए थे। ट्रम्प ने यहां तक कहा था कि अगर अल-सैयद सीनेटर बनते हैं तो उन्हें संसद में प्रवेश करने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद अल-सैयद ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रम्प पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके नाम और धर्म की वजह से न तो पेट्रोल महंगा हुआ है और न ही लोगों को राशन खरीदने या डॉक्टर के पास जाने में परेशानी हो रही है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स को बड़ी बढ़त
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। इस बार सभी सीटों पर मतदान हुआ। बहुमत के लिए किसी पार्टी को कम से कम 218 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव के शुरुआती नतीजों और अनुमानों में डेमोक्रेटिक पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिली है। NBC न्यूज के अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स को 258 सीटें तक मिल सकती हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो पार्टी 1992 के अपने प्रदर्शन की बराबरी कर सकती है। 1992 में डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस में 258 सीटें जीती थीं। इसके बाद 2008 में पार्टी को 257 सीटें मिली थीं।
सीनेट में बहुमत मिलने से ट्रम्प की बढ़ेंगी मुश्किलें
सीनेट अमेरिकी संसद का ऊपरी सदन है। इसमें कुल 100 सदस्य होते हैं। बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी हैं। इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन के कब्जे वाली कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें टेक्सास, मेन, कंसास, नॉर्थ कैरोलिना और अन्य राज्यों की सीटें शामिल बताई गई हैं। मेन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने लंबे समय से सीनेटर रहीं रिपब्लिकन नेता सुसान कॉलिन्स को हराया। वहीं, कंसास में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन की जीत को बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। सीनेट में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स को ट्रम्प प्रशासन की नीतियों और नियुक्तियों पर सवाल उठाने तथा सरकारी फैसलों की निगरानी करने की ज्यादा ताकत मिलेगी।
ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की चर्चा फिर तेज
दोनों सदनों में हार के बाद ट्रम्प की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास अब राष्ट्रपति प्रशासन के खिलाफ जांच और राजनीतिक दबाव बनाने के अधिक अवसर होंगे। ट्रम्प पहले ही 2019 और 2021 में दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं। दोनों बार सीनेट में उन्हें दोषी ठहराने के लिए जरूरी समर्थन नहीं मिला था। अब डेमोक्रेट्स तीसरी बार महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, महाभियोग के लिए हाउस में बहुमत और राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। इसलिए केवल दोनों सदनों में बहुमत मिलने से ट्रम्प को राष्ट्रपति पद से हटाया नहीं जा सकता।
ईरान युद्ध और महंगाई बनी हार की बड़ी वजह
चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ईरान के साथ तनाव, युद्ध और बढ़ती महंगाई को भी बड़ी वजह बताया जा रहा है। रिपब्लिकन सीनेटर रॉन जॉनसन ने भी माना कि ईरान के साथ युद्ध और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा। ट्रम्प ने भी स्वीकार किया कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी जनता नाराज थी। चुनाव परिणाम आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 0.7 प्रतिशत बढ़कर 104.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत 96.72 डॉलर प्रति बैरल रही।
मस्क ने चुनावी हार पर कसा तंज
रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में एलन मस्क ने चुनाव प्रचार के दौरान बड़ी रकम खर्च की थी। रिपोर्ट के मुताबिक मस्क ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों और उनसे जुड़े संगठनों के समर्थन में 3,380 करोड़ रुपये खर्च किए थे। चुनाव परिणाम आने के बाद मस्क ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि लगता है इस बार चुनाव में दखल देने वाली उनकी अंतरिक्ष की लेजर किरणें काम नहीं आईं। उनकी यह टिप्पणी चुनाव में प्रभाव और खर्च को लेकर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में थी।
भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों को मिली जीत
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के कई डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की।
- रो खन्ना : कैलिफोर्निया के 17वें संसदीय क्षेत्र से लगातार छठी बार चुनाव जीते।
- प्रमिला जयपाल : वॉशिंगटन के 7वें संसदीय क्षेत्र से लगातार छठी जीत हासिल की।
- सुहास सुब्रमण्यम : वर्जीनिया के 10वें संसदीय क्षेत्र से दोबारा सांसद चुने गए।
- पिया दांडिया : फ्लोरिडा के 22वें संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की।
इन उम्मीदवारों की जीत से अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी और मजबूत हुई है।
कई राज्यों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी का शानदार प्रदर्शन
सीनेट और हाउस के अलावा गवर्नर चुनावों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। नेवाडा में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार आरोन फोर्ड ने जीत हासिल की। उन्हें राज्य का पहला अश्वेत गवर्नर बताया गया है। न्यू मैक्सिको में डेब हालैंड ने जीत दर्ज कर अमेरिका के किसी राज्य की पहली मूल अमेरिकी महिला गवर्नर बनने का इतिहास रचा। वहीं, टेक्सास और ओहायो जैसे राज्यों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत को महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
मिडटर्म चुनाव में हार से ट्रम्प पर क्या असर पड़ेगा ?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन चुनावों के जरिए यह तय होता है कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। राष्ट्रपति की पार्टी को मिडटर्म चुनाव में हार मिलने पर सरकार के लिए नए कानून पास कराना और अपनी नीतियों को लागू करना मुश्किल हो जाता है। अब डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों में बहुमत होने से वे ट्रम्प प्रशासन के कई फैसलों को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि राष्ट्रपति के पास किसी विधेयक पर वीटो लगाने का अधिकार रहेगा। ट्रम्प के लिए सबसे बड़ी चुनौती अगले दो साल तक विपक्ष के बहुमत वाली संसद के साथ काम करना होगा। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। दोनों सदनों पर विपक्ष का नियंत्रण होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए अपने बचे हुए कार्यकाल में फैसले लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, अब्दुल अल-सैयद की जीत और भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी इन चुनावों की बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।






