पटना, 6 नवंबर 2026 : बिहार विधान परिषद चुनाव में तीन प्रत्याशियों की हार के बाद जदयू ने संगठन के भीतर विरोध करने वालों की पहचान शुरू कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों से दो अलग-अलग रिपोर्ट मांगी हैं। इसमें पार्टी के बागी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ NDA के सहयोगी दलों की भूमिका का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। MLC चुनाव में झटका लगने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अब संगठन के भीतर कार्रवाई की तैयारी में है। पार्टी के तीन प्रत्याशियों की हार के बाद नेतृत्व यह पता लगाने में जुटा है कि चुनाव के दौरान किन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों का साथ नहीं दिया। इसके लिए संबंधित जिलों के जिलाध्यक्षों को रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

जदयू के 4 उम्मीदवार मैदान में थे, 3 को मिली हार

बिहार विधान परिषद चुनाव में जदयू ने चार प्रत्याशी उतारे थे। इनमें तीन उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा, जबकि एक प्रत्याशी विरोध के बावजूद जीत हासिल करने में सफल रहा। चुनाव के दौरान ही पार्टी नेतृत्व को कई क्षेत्रों से विरोध और असहयोग की शिकायतें मिली थीं। अधिकृत प्रत्याशियों ने भी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उनका आरोप था कि कुछ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार और मतदान के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं किया। गुरुवार को हुई पार्टी की बैठक में संबंधित जिलों के जिलाध्यक्षों से शुरुआती जानकारी ली गई। अब मौखिक फीडबैक के आधार पर लिखित रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।

दो तरह की रिपोर्ट तैयार करेंगे जिलाध्यक्ष

जदयू नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों को दो अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। पहली रिपोर्ट में उन जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं का नाम और विवरण शामिल होगा, जिन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों का विरोध किया या उनके समर्थन में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। दूसरी रिपोर्ट में NDA के सहयोगी दलों की भूमिका का आकलन किया जाएगा। इसमें यह जानकारी जुटाई जाएगी कि सहयोगी दलों के स्थानीय नेताओं ने जदयू प्रत्याशियों के पक्ष में कितना सहयोग किया और किन क्षेत्रों में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। पार्टी नेतृत्व इन रिपोर्टों के आधार पर चुनाव में हुए भीतरघात और असहयोग की वास्तविक स्थिति समझना चाहता है।

तिरहुत और सारण में विरोध की शिकायतें ज्यादा

चुनाव के दौरान तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विरोध की शिकायतें अधिक सामने आई थीं। इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले जिलों के जदयू जिलाध्यक्षों को विशेष रूप से जानकारी जुटाने को कहा गया है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि विरोध पार्टी के अंदर से हुआ या NDA के सहयोगी दलों के स्थानीय नेताओं ने भी उम्मीदवारों का साथ नहीं दिया।

अनुशासन कमेटी करेगी रिपोर्ट की समीक्षा

जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ तैयार होने वाली रिपोर्ट का विश्लेषण पार्टी की अनुशासन कमेटी करेगी। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और शिकायतों की समीक्षा के बाद संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। पार्टी नेतृत्व यह जानना चाहता है कि चुनाव में मिली हार के पीछे संगठनात्मक कमजोरी कितनी जिम्मेदार रही और किन लोगों ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया।

पटना स्नातक क्षेत्र में पहले ही हो चुकी है कार्रवाई

पटना स्नातक क्षेत्र में चुनाव के दौरान विरोध की शिकायतों के बाद जदयू विधायक अनंत सिंह और पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि पार्टी अब इस क्षेत्र में विरोध की अन्य शिकायतों की पड़ताल कर रही है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना के अलावा नालंदा व नवादा जिले भी शामिल हैं। इन जिलों में चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशी को कितना समर्थन मिला और कहां असहयोग की स्थिति रही, इसकी जानकारी भी नेतृत्व को सौंपी जाएगी।

चुनावी हार के बाद संगठन में जवाबदेही तय करने की तैयारी

तीन प्रत्याशियों की हार के बाद जदयू नेतृत्व अब संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद पार्टी यह तय करेगी कि किन नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी है। इसके साथ ही NDA के सहयोगी दलों की भूमिका पर भी पार्टी की नजर है। रिपोर्ट आने के बाद चुनावी हार के कारणों और संगठन के भीतर असंतोष की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।