वॉशिंगटन डीसी, 5 नवंबर 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत और तुर्किये से जुड़े कई कारोबारियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाकर तेल बेचने और कारोबार जारी रखने में मदद की। अमेरिकी कार्रवाई में भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनसे जुड़ी नौ कंपनियों एवं संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेजों और जहाजों के गलत रजिस्ट्रेशन के जरिए ईरानी तेल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में मदद की। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ी हैं। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपनी नीति का हिस्सा बताया है।
भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और पत्नी पर क्या आरोप ?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारत में रहने वाले कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़े थे, जो ईरान के तेल कारोबार को प्रतिबंधों से बचाने में मदद करता था। अमेरिका का आरोप है कि इस नेटवर्क ने फर्जी समुद्री दस्तावेज और जहाजों के गलत रजिस्ट्रेशन के जरिए प्रतिबंधित जहाजों की असली पहचान छिपाने में सहायता की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शर्मा से जुड़ी नौ कंपनियों और संस्थाओं के साथ दो अन्य भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंधित किया गया है।
फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन से कैसे होता था ईरान को फायदा ?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का दावा है कि कथित नेटवर्क जहाजों को दूसरे देशों के नाम पर गलत रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता था। इसके लिए गयाना, इस्वातिनी और लाओस जैसे देशों के नाम का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। इन दस्तावेजों के जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाज अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर सकते थे। अमेरिका का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ जहाज ईरानी सेना और उससे संबंधित संगठनों के लिए भी काम कर रहे थे। इस तरह के कथित फर्जी रजिस्ट्रेशन से ईरान को प्रतिबंधों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपना तेल पहुंचाने में मदद मिल रही थी।
तुर्किये की कंपनी पर भी अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध
अमेरिका की इस कार्रवाई का दायरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। ट्रम्प प्रशासन ने तुर्किये की कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि यह कंपनी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को हवाई अड्डों पर जरूरी सेवाएं और ग्राउंड हैंडलिंग की सुविधाएं उपलब्ध करा रही थी। अमेरिका का मानना है कि इस तरह की सहायता से ईरान से जुड़ी प्रतिबंधित विमानन गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिलती है।
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ क्यों तेज की कार्रवाई ?
अमेरिका की यह कार्रवाई ट्रम्प प्रशासन के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत की गई है। इस अभियान का मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर रोक लगाना और उसकी आर्थिक गतिविधियों को कमजोर करना है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान की मदद करने वाले लोगों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से ईरान की आर्थिक गतिविधियों में मदद करने वाले नेटवर्क को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि उसकी आर्थिक पाबंदियों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ईरानी मुद्रा रियाल में भारी गिरावट और महंगाई में तेजी को भी इसी दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या भारत के खिलाफ है अमेरिका की यह कार्रवाई ?
अमेरिका की ओर से भारतीय कारोबारियों और कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि इस कार्रवाई को सीधे तौर पर भारत सरकार के खिलाफ कदम नहीं माना जा सकता। फिलहाल अमेरिकी प्रतिबंधों का निशाना वे खास व्यक्ति और कारोबारी संस्थाएं हैं, जिन पर ईरान को प्रतिबंधों से बचाकर तेल कारोबार में मदद करने का आरोप लगाया गया है। इस कार्रवाई से एक बात स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन अब ईरान पर दबाव बनाने के लिए सिर्फ वहां की सरकारी संस्थाओं तक सीमित नहीं है। अमेरिका दूसरे देशों में मौजूद उन नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहा है, जिन्हें वह ईरान के प्रतिबंधित कारोबार में मददगार मानता है। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई का भारतीय कारोबारियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।






