रियाद, 22 अक्टूबर 2026 : सऊदी अरब में बुधवार यानी 21 अक्टूबर की रात सुरक्षा हालात बिगड़ गए। दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सऊदी अरामको के शायबह तेल क्षेत्र को निशाना बनाने की घटनाओं में तीन लोगों की मौत जबकि कई लोगों के घायल होने की खबर है। इसी बीच अमेरिका ने सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर सऊदी अरब में तैनात कुछ गैर-जरूरी राजनयिकों और अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और आठ अन्य लोग घायल हो गए। वहीं, शायबह तेल क्षेत्र में ड्रोन को रोकने के दौरान गिरे मलबे से दो लोगों की मौत हुई। इस घटना में भारतीय नागरिक समेत अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है।
दम्माम एयरपोर्ट पर हमले के बाद उड़ानों पर असर
सऊदी अरब के पूर्वी शहर दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार रात हमला हुआ। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, इस घटना में एक व्यक्ति की जान गई, जबकि आठ लोग घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हमले के बाद हवाई अड्डे की सुरक्षा और उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा। फ्लाइट संचालन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, कुछ विमानों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया। क्षेत्र में लगातार हमलों की आशंका के कारण विमानन सेवाओं को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।
शायबह तेल क्षेत्र में ड्रोन हमले से दो लोगों की मौत
सऊदी अरब के दक्षिण-पूर्वी इलाके में स्थित शायबह तेल क्षेत्र में भी ड्रोन हमले की घटना सामने आई है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार तेल ठिकाने की ओर आ रहे ड्रोन को एयर डिफेंस ने रोक लिया, लेकिन उसके मलबे से दो लोगों की मौत हो गई और अन्य कई लोग घायल हो गए। इस घटना में एक भारतीय नागरिक के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। भारतीय दूतावास ने घायल नागरिक की सहायता के लिए सऊदी अधिकारियों के संपर्क में रहने की बात कही है। शायबह तेल क्षेत्र सऊदी अरामको के प्रमुख तेल उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे संवेदनशील ऊर्जा ठिकानों के आसपास हमलों की घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ाती हैं।
अमेरिका ने अपने कुछ राजनयिकों को सऊदी अरब छोड़ने को कहा
लगातार हमलों और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब में तैनात कुछ गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कदम रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास और उससे जुड़े वाणिज्य दूतावासों के कर्मचारियों पर लागू किया गया है।अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि नागरिक हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों से जनहानि और यात्रा में व्यवधान पैदा हो सकते हैं। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पहले भी संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके बाद वहां सीमित संख्या में कर्मचारी काम कर रहे थे। हाल के दिनों में कुछ राजनयिकों की वापसी हुई थी पर नए सुरक्षा जोखिमों के चलते कर्मचारियों की संख्या फिर घटाई गई है।
क्या दूसरे खाड़ी देशों से भी अमेरिकी कर्मचारी लौटेंगे ?
सऊदी अरब में कर्मचारियों को वापस बुलाने के बीच संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, कतर और बहरीन में अमेरिकी राजनयिक मिशनों के संचालन पर भी सुरक्षा कारणों से पाबंदियां लगाई गई हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब के लिए जारी अनिवार्य प्रस्थान निर्देश को दूसरे देशों पर लागू मानना सही नहीं होगा। अलग-अलग देशों में कर्मचारियों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था संबंधी फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लिए जा रहे हैं।
सऊदी अरब में पहले भी हो चुके हैं हमले
अक्टूबर में सऊदी अरब के हवाई अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में 13 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर आई थी। इन घटनाओं के बाद उड़ानों के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि, हर नई घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने में संबंधित अधिकारियों की पुष्टि महत्वपूर्ण है।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है तनाव
सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल क्षेत्र से जुड़ी ताजा घटनाओं तथा अमेरिका के कर्मचारियों को वापस बुलाने के फैसले ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर नए सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की घटनाएं जारी रहती हैं, तो इससे नागरिकों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सऊदी अधिकारियों और अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर नजर रहेगी।




