तेल अवीव/यरुशलम, 19 अक्टूबर 2026 : इजरायली शोधकर्ता यशायाह रोसेनमैन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कामकाज, अनुशासन और संगठनात्मक ढांचे की सराहना की है। उनका कहना है कि RSS से जुड़े कुछ लोगों से मुलाकात के दौरान उन्हें कई मुद्दों पर विचारों में समानता महसूस हुई। रोसेनमैन ने संघ के 100 साल के इतिहास पर आधारित एक नई किताब में भी योगदान दिया है।

RSS के कामकाज और अनुशासन की तारीफ

रोसेनमैन के मुताबिक भारत में इजरायली राजनयिक टीम के कार्यक्रमों के दौरान उनकी RSS के कुछ सदस्यों से मुलाकात हुई थी। बातचीत के बाद उन्हें लगा कि कई सामाजिक और वैश्विक मुद्दों पर दोनों की सोच मिलती-जुलती है। उन्होंने कहा कि इस अनुभव से उन्हें भारतीय समाज को और करीब से समझने का अवसर भी मिला। रोसेनमैन ‘हंड्रेड इयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ नामक पुस्तक के सह-लेखक हैं। इस पुस्तक में RSS के 100 वर्षों के सफर और संगठन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। पुस्तक की लेखिका रश्मि सामंत हैं।

मेरिटोक्रेसी को बताया महत्वपूर्ण

रोसेनमैन ने RSS की प्रमुख विशेषताओं में योग्यता-आधारित व्यवस्था यानी Meritocracy को भी शामिल किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का उदाहरण देते हुए कहा कि मेहनत और उपलब्धियों के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर युवाओं में आकांक्षा पैदा करते हैं। उनके अनुसार, भारत में प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलेंगे तो इससे देश की समृद्धि को भी बढ़ावा मिल सकता है।

भारत और इजरायल के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर

रोसेनमैन ने पुस्तक में अपने योगदान को भारत और इजरायल के बीच आपसी समझ बढ़ाने का एक अवसर बताया। उन्हें उम्मीद है कि उनका लेख RSS और भारत के बाहर के लोगों, विशेष रूप से इजरायल तथा यहूदी समुदाय के बीच संवाद को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा। उन्होंने भारतीय और इजरायली संस्कृतियों के तुलनात्मक अध्ययन के महत्व पर भी जोर दिया।

RSS को केवल राजनीतिक नजरिए से न देखें : रश्मि सामंत

पुस्तक की लेखिका रश्मि सामंत ने RSS को सेवा-आधारित संगठन बताते हुए कहा कि उसे केवल राजनीतिक नजरिए से देखना उसके कामकाज की पूरी तस्वीर सामने नहीं लाता। उनके मुताबिक, संगठन को समझने के लिए उसकी शाखाओं में होने वाली गतिविधियों, खेल-कूद, शारीरिक अभ्यास और बौद्धिक चर्चाओं को भी देखना चाहिए।