इस्लामाबाद/बैंकॉक, 19 अक्टूबर 2026। आर्थिक संकट और भारी विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम जिम्मेदारी मिली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र समर्थित Borrowers’ Platform की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता संभाली। यह मंच विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन से जुड़े अनुभव साझा करने और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अपनी आवाज मजबूत करने का अवसर देता है। पाकिस्तान सरकार इस जिम्मेदारी को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देख रही है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मंच की अध्यक्षता से पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबरने में कोई सीधा फायदा मिलेगा ?
क्या है Borrowers’ Platform ?
Borrowers’ Platform विकासशील देशों का ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपने अनुभव, चुनौतियां और कर्ज प्रबंधन से जुड़ी रणनीतियां साझा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य देशों को कर्ज की स्थिति बेहतर ढंग से संभालने, तकनीकी सहायता हासिल करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए विकल्प समझने में मदद करना है। इस मंच का सचिवालय UNCTAD यानी संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन संभालता है। इसकी शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई थी और अक्टूबर में बैंकॉक में गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक के साथ इसका पहला वार्षिक कार्यकाल शुरू हुआ।
कितना ताकतवर है यह अंतरराष्ट्रीय मंच ?
इस मंच की अहमियत इसलिए है क्योंकि विकासशील देशों को अक्सर विदेशी कर्ज चुकाने, ब्याज की बढ़ती लागत और विकास योजनाओं के लिए धन जुटाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। Borrowers’ Platform ऐसे देशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय चर्चाओं में अपनी सामूहिक आवाज मजबूत करने का अवसर देता है। हालांकि, इसकी शक्तियों की एक सीमा भी है। यह मंच सदस्य देशों की ओर से कर्जदाताओं के साथ कर्ज माफी या भुगतान की शर्तों पर सामूहिक बातचीत नहीं करता। यह किसी देश का कर्ज अपने आप कम या माफ भी नहीं कर सकता।इसलिए इसकी ताकत सीधे आर्थिक राहत देने के बजाय तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझा करने और कर्ज प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने में है।
पाकिस्तान को क्या जिम्मेदारी मिली है ?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब अब गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में मंच की रणनीतिक प्राथमिकताओं और 2026–27 के कार्य कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएंगे। पाकिस्तान ने इस मंच की स्थापना की प्रक्रिया में भी हिस्सा लिया था। शुरुआती कार्य समूह में वह उपाध्यक्ष की भूमिका में था, जबकि मिस्र ने अंतरिम नेतृत्व संभाला था। पाकिस्तान की घोषित प्राथमिकताओं में कर्ज प्रबंधन की प्रक्रियाओं को मजबूत करना, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करना और विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने के नए साधनों पर विचार करना शामिल है।
पाकिस्तान पर कितना कर्ज है ?
पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रमों पर निर्भर रहा है। 2023 में देश गंभीर भुगतान संकट के करीब पहुंच गया था। IMF के बेलआउट कार्यक्रम ने उस समय पाकिस्तान को तत्काल वित्तीय दबाव से निपटने में मदद की। पाकिस्तान को 2024 में 7 अरब डॉलर का IMF कार्यक्रम मिला था। इसके अलावा जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने को अलग वित्तीय सहायता कार्यक्रम स्वीकृत हुआ। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां लगभग 137.55 अरब डॉलर थीं। यह आंकड़ा केवल बाहरी देनदारियों से संबंधित है; इसे देश के कुल सरकारी कर्ज का पर्याय नहीं समझना चाहिए।
क्या अध्यक्ष बनने से पाकिस्तान का कर्ज कम होगा ?
इसका सीधा जवाब है—नहीं। Borrowers’ Platform की अध्यक्षता मिलने से पाकिस्तान का कर्ज अपने आप कम नहीं होगा और न ही उसे अतिरिक्त सहायता मिलने की कोई गारंटी है।पाकिस्तान को अपने कर्ज का प्रबंधन करने, आर्थिक सुधार लागू करने और वित्तीय स्थिरता मजबूत करने के लिए अलग-अलग कदम उठाने होंगे। इस मंच से उसे दूसरे देशों के अनुभवों और तकनीकी सहयोग का लाभ मिल सकता है, लेकिन आर्थिक संकट से निकलने के लिए यह अपने आप में समाधान नहीं है। पाकिस्तान को Borrowers’ Platform की अध्यक्षता मिलना कूटनीतिक और संस्थागत रूप से महत्वपूर्ण है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मंच विकासशील देशों के कर्ज प्रबंधन में कितना उपयोगी सहयोग दे पाता है और पाकिस्तान अपनी आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए इसका कितना प्रभावी इस्तेमाल करता है।




