तेल अवीव, 29 अक्टूबर 2026 : इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के बाद विदेशी दखल की आशंका ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। केंद्रीय चुनाव समिति ने सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, 92.6% वोटों की गिनती के बाद भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के गठबंधन बहुमत से दूर हैं।
इजराइल चुनाव में विदेशी फंडिंग की जांच के आदेश
इजराइल में चुनाव के दौरान विदेशी फंडिंग के जरिए मतदान को प्रभावित करने के आरोप सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को इन आरोपों की जांच करने और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया है कि कतर और तुर्किये से इजराइल तथा वेस्ट बैंक में कथित तौर पर पैसा भेजा गया। पार्टी को आशंका है कि इस धन का इस्तेमाल अरब नागरिकों की फंडिंग के लिए किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इजराइली पुलिस ने भी चुनाव में धांधली के आरोपों के समर्थन में सबूत मिलने से इनकार किया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
92.6% वोटों की गिनती, किसी गठबंधन को बहुमत नहीं
इजराइल में मतगणना जारी है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर आगे बताया जा रहा है। वहीं, अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। मौजूदा रुझानों में कोई भी गठबंधन इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में सरकार गठन के लिए छोटे राजनीतिक दलों और अरब पार्टियों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। अंतिम नतीजे आने के बाद गठबंधन बनाने को लेकर राजनीतिक बातचीत तेज होने की उम्मीद है।
आइजनकोट ने जांच के बहाने शपथ ग्रहण टालने से किया आगाह
विपक्षी याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने कहा है कि चुनाव में विदेशी दखल की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जांच प्रक्रिया का इस्तेमाल नई संसद के शपथ ग्रहण में देरी करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। आइजनकोट का कहना है कि चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन जांच के कारण संसदीय प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने अरब पार्टियों के नेताओं से पूछताछ और गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने विदेशी फंडिंग के जरिए चुनाव प्रभावित करने की आशंका जताई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अरब पार्टियों की भूमिका होगी अहम
इजराइल चुनाव के शुरुआती रुझानों में अरब पार्टियों को लगभग 19 सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में अगली सरकार के गठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अरब पार्टियों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने नेतन्याहू सरकार को सत्ता से हटाने के लिए वैकल्पिक सरकार बनाने में सहयोग की पेशकश की है। हालांकि आइजनकोट और उनके सहयोगियों के लिए अरब पार्टियों के समर्थन के साथ स्थिर सरकार बनाना बड़ी राजनीतिक चुनौती हो सकती है। इस बीच इजराइल के यरूशलम, तेल अवीव व हाइफा में यहूदी-अरब सरकार बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं।
इजराइल में 77.7% मतदान दर्ज
इजराइल के केंद्रीय चुनाव समिति के आंकड़ों के मुताबिक, चुनाव के दौरान मतदान लगभग 77.7% रहा। यह 1999 के बाद सबसे अधिक मतदान बताया गया है। इस बार सेना के जवानों में भी मतदान को लेकर उत्साह देखा गया। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के अनुसार, सैनिकों का मतदान प्रतिशत 79.9% रहा, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 6.2 प्रतिशत अधिक है। अस्पतालों, जेलों, सैन्य ठिकानों और विदेशों में तैनात राजनयिकों के वोटों की गिनती भी चुनावी परिणामों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इन मतों से सीटों के बंटवारे में बड़े बदलाव की संभावना कम बताई गई है।
अब सरकार गठन पर टिकी निगाहें
इजराइल में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अंतिम नतीजों के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग राजनीतिक दलों से बातचीत कर सकते हैं, ताकि बहुमत का समर्थन जुटाने वाले नेता को सरकार बनाने का अवसर दिया जा सके।नियमों के मुताबिक, सरकार बनाने के लिए नामित नेता को शुरुआत में 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। इस तरह सरकार गठन के लिए कुल 42 दिन तक का समय मिल सकता है। फिलहाल, विदेशी दखल के आरोपों की जांच, अरब पार्टियों की भूमिका और गठबंधन की संभावनाएं इजराइल की राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। अंतिम आधिकारिक नतीजों और जांच रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।




