वॉशिंगटन डीसी, 5 नवंबर 2026 : अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बढ़त बनाते हुए बहुमत हासिल कर लिया है। इस हार के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ युद्ध उनकी पार्टी के खराब प्रदर्शन की एक बड़ी वजह रहा। हालांकि ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्हें दोबारा फैसला लेने का मौका मिला तो वह फिर से ईरान पर हमला करेंगे। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। इसके बावजूद उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।
ईरान जंग बनी रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजह ?
मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिकी राजनीति में बहस तेज हो गई है। चुनाव के दौरान महंगाई, पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और विदेश नीति जैसे मुद्दे मतदाताओं के बीच चर्चा में रहे। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ ट्रंप के सैन्य अभियान पर नाराजगी जताई। इसका असर चुनावी नतीजों में दिखाई दिया। हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी में सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के नेता अब चुनावी नतीजों की समीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पार्टी की हार के पीछे युद्ध को बड़ी वजह बताया।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स को बहुमत
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर इस बार चुनाव हुए थे। बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। अब तक आए चुनावी नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने 242 सीटें जीत ली हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के खाते में 151 सीटें आई हैं। बाकी 42 सीटों पर मतगणना जारी है। जानकारी के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस में कुल 258 सीटें मिल सकती हैं। ऐसा होने पर पार्टी 1992 के बाद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहरा सकती है।
सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी मजबूत
अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट की कुल 100 सीटों में से इस बार 35 सीटों पर चुनाव हुए थे।अब तक घोषित नतीजों के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 सीटें जीती हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 13 सीटें मिली हैं। दो सीटों पर मतगणना जारी है। इन नतीजों के बाद सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की कुल संख्या 54 और रिपब्लिकन पार्टी की 44 बताई गई है। सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। इस तरह डेमोक्रेट्स ने दोनों सदनों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेट्स को बढ़त
अमेरिका के गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कुल 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए चुनाव हुए थे। अब तक 34 राज्यों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने 22 राज्यों में जीत दर्ज की है, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 12 राज्यों में सफलता मिली है। दो राज्यों में मतगणना जारी है।
ट्रंप के फैसलों पर अब डेमोक्रेट्स रखेंगे नजर
मिडटर्म चुनाव में जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में ट्रम्प प्रशासन के फैसलों की निगरानी करने का बड़ा मौका मिलेगा। जनवरी में नई संसद के कामकाज शुरू करने के बाद डेमोक्रेट्स कई अहम फैसलों को प्रभावित कर सकेंगे।
ट्रंप की नियुक्तियों पर लगा सकेंगे रोक : अमेरिकी राष्ट्रपति मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और संघीय जजों की नियुक्ति के लिए नाम प्रस्तावित करते हैं। हालांकि कई अहम नियुक्तियों के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। सीनेट में डेमोक्रेट्स के बहुमत के कारण ट्रम्प के नामित उम्मीदवारों की नियुक्तियों में मुश्किल आ सकती है।
प्रशासन के कामकाज की जांच : हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स ट्रम्प प्रशासन की नीतियों और फैसलों की जांच के लिए संसदीय समितियों का इस्तेमाल कर सकेंगे।हालांकि, राष्ट्रपति के वीटो को पलटने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। डेमोक्रेट्स के पास फिलहाल इतनी सीटें नहीं हैं।
जीत के बाद डेमोक्रेट्स के सामने वादे पूरे करने की चुनौती
चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने अपने वादों को पूरा करने की चुनौती होगी। पार्टी ने महंगाई कम करने और ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा है कि उनकी पार्टी आम अमेरिकी नागरिकों के हितों के लिए काम करेगी। उनके अगले हाउस स्पीकर बनने की संभावना भी जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत नेता होंगे।
ईरान युद्ध खत्म होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को उम्मीद है कि चुनावी नतीजों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम हो सकता है। गुरुवार को एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.9 प्रतिशत गिरकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 86.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाजार के जानकारों की नजर अब अमेरिका की अगली रणनीति और ईरान के साथ संभावित बातचीत पर है।
ट्रंप की हार से अमेरिकी राजनीति में बदलेगा समीकरण
मिडटर्म चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा झटका माने जा रहे हैं। दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति के बाद अब ट्रम्प प्रशासन के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। ईरान युद्ध, महंगाई और आर्थिक नीतियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति में टकराव और तेज होने की संभावना है।






