ढाका, 18 अगस्त 2026 : तीस्ता नदी प्रोजेक्ट को लेकर बांग्लादेश के रुख में बदलाव के संकेत देखने को मिले हैं। चीन की मदद से इस परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर नरम रुख भी दिखाया है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शहीदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ अपने दोस्ताना संबंध खराब नहीं करना चाहता है। इसके साथ ही उन्होंने भारत से तीस्ता नदी प्रबंधन के मामले में बांग्लादेश के हितों को भी ध्यान में रखने की अपील की है।

'दोस्त को दूसरे दोस्त के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए'

ढाका में एक सेमिनार के दौरान बांग्लादेशी मंत्री ने कहा कि पड़ोसी देश होने के नाते भारत और बांग्लादेश के बीच अच्छे संबंध महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत के अपने हित हैं तो बांग्लादेश के भी अपने हित हैं। मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि एक मित्र को दूसरे मित्र के हितों की भी रक्षा करनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब तीस्ता नदी प्रोजेक्ट को लेकर बांग्लादेश चीन की मदद ले रहा है। ऐसे में बांग्लादेश की ओर से भारत के साथ रिश्ते खराब न करने की बात को अहम माना जा रहा है।

तीस्ता प्रोजेक्ट पर क्यों है बांग्लादेश की नजर ?

बांग्लादेश सरकार तीस्ता नदी के प्रबंधन के जरिए देश के उत्तरी हिस्सों में बाढ़ और नदी कटाव की समस्या से निपटना चाहती है। इसके अलावा सूखे के मौसम में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उत्तरी बांग्लादेश के करीब पांच से छह जिले तीस्ता परियोजना से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। इन इलाकों के लोग लंबे समय से नदी के कटाव और पानी की समस्या से प्रभावित हैं। सरकार ने परियोजना को लेकर विशेषज्ञों के साथ कई बैठकें और सेमिनार किए हैं। बांग्लदेशी मंत्री के मुताबिक इस मामले में विस्तृत अध्ययन के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

भारत और बांग्लादेश के बीच क्यों अहम है तीस्ता ?

तीस्ता नदी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह नदी बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं भारत के पश्चिम बंगाल में भी इसका पानी सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए अहम है। तीस्ता के पानी के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है। 1983 में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यवस्था बनी थी, जिसमें पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया था। इसके बाद 2011 में भी एक समझौते का मसौदा तैयार हुआ, लेकिन पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका और यह मामला अब तक लटका है।

चीन की एंट्री से बढ़ी भारत की चिंता

तीस्ता परियोजना में चीन की भागीदारी ने इस मुद्दे को सिर्फ जल बंटवारे तक सीमित नहीं रखा है। भारत की सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं के लिहाज से तीस्ता क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बांग्लादेश का चीन के साथ परियोजना को आगे बढ़ाना भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा है। अब बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री का यह कहना कि 'भारत के साथ दोस्ताना रिश्ते खराब नहीं करना चाहते', संकेत देता है कि ढाका तीस्ता मुद्दे पर भारत के साथ संवाद का रास्ता खुला रखना चाहता है। मगर इस परियोजना में चीन की भागीदारी के बाद अब भारत सतर्क हो गया है।