ढाका, 20 अगस्त 2026 : बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के नए राष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को चुनाव में बड़ी शिकस्त दी है। संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के पक्ष में 88 वोट पड़े। करीब तीन घंटे चली मतदान प्रक्रिया के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने परिणाम की घोषणा की।
255 वोट पाकर राष्ट्रपति बने फखरुल
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान गुरुवार शाम पांच बजे समाप्त हुआ। इसके बाद संसद में मतों की गिनती की गई। चुनाव आयोग के अनुसार सभी 349 सांसदों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया। कुल जारी मतपत्रों में से 343 का इस्तेमाल हुआ, जबकि छह मतपत्र इस्तेमाल नहीं किए गए। इस्तेमाल किए गए सभी 343 मतपत्र वैध पाए गए। चुनाव प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1991 के तहत चार मतपत्र बदले गए।
जमात समर्थित उम्मीदवार ओली अहमद को मिली हार
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के सामने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, संसद में हुए मतदान में ओली अहमद को 88 वोट ही मिले। इस तरह फखरुल इस्लाम आलमगीर ने 167 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ?
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह लंबे समय तक पार्टी के महासचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह ठाकुरगांव-1 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारी मंत्री के तौर पर भी काम किया है। इससे पहले 2001 से 2006 के बीच वह कृषि मंत्रालय और बाद में नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके हैं।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
फखरुल इस्लाम आलमगीर का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान छात्र संघ से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। 1969 के आंदोलन के दौर में वह संगठन की ढाका विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद 1972 में उन्होंने ढाका कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाना शुरू किया।
सरकारी सेवा और प्रशासन में भी निभाई जिम्मेदारी
फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राष्ट्रपति जियाउर रहमान के प्रशासन में भी काम किया। उन्होंने उप प्रधानमंत्री एसए बारी और राज्य मंत्री अमीरुल इस्लाम कमाल के सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने ठाकुरगांव सरकारी कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाया। वह बांग्लादेश सरकार के निरीक्षण एवं लेखा निदेशालय में ऑडिटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने यूनेस्को के साथ भी काम किया।
बांग्लादेश की राजनीति में क्यों अहम है यह चुनाव ?
फखरुल इस्लाम आलमगीर का राष्ट्रपति चुना जाना बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BNP के वरिष्ठ नेता के तौर पर उनका लंबा राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव रहा है। वहीं, उनके मुकाबले जमात-ए-इस्लामी समर्थित उम्मीदवार की मौजूदगी ने इस चुनाव को और महत्वपूर्ण बना दिया था। अब राष्ट्रपति पद पर फखरुल इस्लाम आलमगीर की भूमिका और नई सरकार के साथ उनका तालमेल बांग्लादेश की आगे की राजनीति के लिए अहम रहेगा।




