ढाका, 20 अगस्त 2026 : भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर खींचतान सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर बांग्लादेशी पक्ष ने कई शर्तें रखीं, लेकिन करीब 45 मिनट की अहम बैठक के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद तारिक रहमान के नई दिल्ली दौरे को लेकर असमंजस और बढ़ गया है। इस तरह बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का इस माह दिल्ली आना अब संभव नहीं लग रहा है।
45 मिनट तक चली अहम बैठक, फिर भी नहीं निकला रास्ता
रिपोर्ट के अनुसार, 18 अगस्त की रात बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के बीच करीब 45 मिनट तक बैठक हुई। यह मुलाकात रात करीब 10:30 बजे शुरू हुई और 11:15 बजे तक चली। बताया गया कि बैठक का मुख्य मुद्दा तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की संभावनाएं थीं। हालांकि, बैठक के बाद तत्काल किसी सकारात्मक नतीजे की जानकारी सामने नहीं आई।
बांग्लादेश ने भारत के सामने रखीं कई मांगें
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेशी पक्ष ने बातचीत के दौरान कई मांगें सामने रखीं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी, कथित हत्याकांड से जुड़े दो आरोपियों को सौंपना और बांग्लादेश द्वारा वांछित 111 लोगों को वापस भेजने जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। इन 111 लोगों में पूर्व अवामी लीग के कई नेता, मंत्री व सांसदों के अलावा पुलिस अधिकारी, नौकरशाह तथा अन्य सरकारी अधिकारियों के शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
भारत ने रिश्ते सुधारने की जताई इच्छा
भारत की ओर से लगातार बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंधों पर जोर दिया जाता रहा है। विदेश मंत्रालय भी कह चुका है कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी हित और पारस्परिकता के आधार पर आगे बढ़ने चाहिए। शेख हसीना से जुड़े प्रत्यर्पण अनुरोध पर भारत का कहना है कि मामले की समीक्षा स्थापित प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
तारिक रहमान के दिल्ली दौरे पर क्यों छाया संकट ?
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 14 अगस्त को नई दिल्ली आने की इच्छा जताई थी। इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेशी पक्ष के सख्त रुख के कारण यह मौका कमजोर पड़ गया। कुछ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि तारिक रहमान की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने में मदद कर सकती थी।
शेख हसीना के बयान का भी असर ?
रिपोर्ट के मुताबिक, पांच अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेशी राजनीतिक हलकों में नाराजगी बढ़ी। इसी बीच तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर भी दबाव बढ़ने की बात कही गई है। बांग्लादेशी राजनीति में BNP, जमात-ए-इस्लामी और NCP के बीच समीकरण भी इस पूरे घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिए अहम मोड़
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बढ़ा था। ऐसे में तारिक रहमान का संभावित दिल्ली दौरा दोनों देशों के बीच संवाद दोबारा शुरू करने का अवसर माना जा रहा था। लेकिन सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक शर्तों और राजनीतिक मतभेदों के कारण यह दौरा फिलहाल अनिश्चित नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत से ही साफ होगा कि तारिक रहमान दिल्ली आएंगे या नहीं।




