नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026
भारत सरकार देश में संचालित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियम (कॉमन स्टैंडर्ड्स) लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का मानना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग नियम और फीचर्स होने से कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे में सरकार सभी मैसेजिंग सेवाओं के लिए स्पष्ट और समान कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है।
WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर
सूत्रों के अनुसार, सरकार विशेष रूप से WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सतर्क है। आशंका जताई जा रही है कि यदि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम का अधिक इस्तेमाल होने लगा, तो फर्जी पहचान (इम्पर्सनेशन), ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर ठगी और तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, अपराधियों की पहचान करने और जांच एजेंसियों के लिए संदिग्ध खातों तक पहुंचना भी अधिक कठिन हो सकता है।
सभी प्लेटफॉर्म पर होंगे एक जैसे नियम
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में किसी एक प्लेटफॉर्म के किसी फीचर पर आपत्ति जताना आसान नहीं होता, क्योंकि दूसरे प्लेटफॉर्म पर वही सुविधा उपलब्ध रहती है। इसी असमानता को दूर करने के लिए सरकार सभी मैसेजिंग ऐप्स के लिए एक समान नियम बनाने पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में लिए जाने वाले किसी भी निर्णय को स्पष्ट कानूनी आधार मिल सके।
फाइनल फैसले से पहले होगी चर्चा
सरकार ने संकेत दिए हैं कि किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले WhatsApp सहित सभी प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल तकनीकी नवाचार को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, साइबर अपराधों पर रोक और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत में डिजिटल संचार व्यवस्था के लिए एक नई नियामक प्रणाली विकसित हो सकती है।




