मुंबई | 10 जुलाई 2026

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी महान बल्लेबाजों की चर्चा होगी, सुनील गावस्कर का नाम सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। 10 जुलाई 1949 को मुंबई में जन्मे गावस्कर ने उस दौर में भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई, जब वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के तेज गेंदबाज अपनी खतरनाक गेंदबाजी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थे। बिना आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और लंबे समय तक बिना हेलमेट बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने साहस, तकनीक और धैर्य का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट का पहला 'पोस्टर बॉय' बना दिया।

स्कूल क्रिकेट से शुरू हुआ सुनहरा सफर

गावस्कर की प्रतिभा बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। स्कूल क्रिकेट में उन्होंने 246, 222 और 85 रन की यादगार पारियां खेलकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। वर्ष 1966 में उन्हें 'बेस्ट स्कूल बॉय क्रिकेटर ऑफ द ईयर' चुना गया। इसके बाद उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और 1971 में भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाई।

बिना हेलमेट बनाया विश्व रिकॉर्ड

गावस्कर ने ऐसे दौर में बल्लेबाजी की, जब तेज बाउंसर बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हुआ करते थे। इसके बावजूद उन्होंने नई गेंद का सामना करते हुए भारतीय टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं। उन्होंने 125 टेस्ट मैचों की 214 पारियों में 10,122 रन, 34 शतक और 45 अर्धशतक बनाए। संन्यास के समय टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन और सबसे ज्यादा शतक का विश्व रिकॉर्ड भी उनके नाम था।

विश्व कप विजेता टीम का भी रहे हिस्सा

सुनील गावस्कर ने 108 वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 3,092 रन बनाए। वह 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली ऐतिहासिक भारतीय टीम के सदस्य भी रहे। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई।

आज भी क्रिकेट जगत की प्रभावशाली आवाज

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी गावस्कर खेल से जुड़े हुए हैं। वह दुनिया के सबसे सम्मानित क्रिकेट कमेंटेटरों और विश्लेषकों में शामिल हैं। उनके अनुभव और बेबाक राय आज भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। भारत सरकार ने उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया। 10 जुलाई को उनका जन्मदिन भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास को याद करने का एक विशेष अवसर है।