नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 : अमेरिका और कनाडा में भारतीय नागरिकों और छात्रों के लिए इमिग्रेशन नियमों को लेकर चिंता बढ़ी है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगस्त के पहले 15 दिनों में 5,200 से अधिक भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया है, जबकि कनाडा के अल्बर्टा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) से जुड़े बदलावों के बाद करीब 1,500 भारतीय छात्रों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई है। हालांकि अमेरिका से भारतीयों के डिपोर्टेशन को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था, जबकि 2026 में जून तक 1,076 भारतीयों को वापस भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। मालूम हो कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे साल मिशन डिपोर्टेशन तेज कर दिया है। इस बार की डिपोर्टेशन लिस्ट में एच-1 बी, ओ-1 और स्टूडेंट वीसा पर अमेरिका गए भारतीय भी शामिल हैं। इन प्रोफेशनल्स की भी अच्छी खासी संख्या है। इस साल हर तीसरे हफ्ते में एक डिपोर्टेशन फ्लाइट रवाना की गई।

ट्रंप प्रशासन में डिपोर्टेशन पर सख्ती

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। इस अभियान में अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के साथ-साथ कुछ ऐसे भारतीयों के मामले भी सामने आए हैं, जिनके पास वीजा या अन्य वैध इमिग्रेशन स्टेटस था। ऐसे मामलों में वीजा नियमों के कथित उल्लंघन, नौकरी से जुड़ी शर्तों या अन्य कानूनी कारणों को आधार बनाया जा सकता है। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी व्यक्ति को डिपोर्ट करने से पहले संबंधित अमेरिकी इमिग्रेशन प्रक्रिया लागू होती है।

2025 में 3,567 भारतीय हुए थे डिपोर्ट

भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जून 2026 में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। वहीं, 2026 में जून तक 1,076 भारतीयों के डिपोर्टेशन की जानकारी दी गई थी। पांच फरवरी 2025 को अमेरिका ने 104 भारतीय नागरिकों को सैन्य विमान से अमृतसर भेजा था। इन लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी हुआ था।

क्या सोशल मीडिया पोस्ट या ट्रैफिक नियमों से डिपोर्टेशन हो सकता है?

रिपोर्ट में कुछ ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें वीजा पर अमेरिका पहुंचे लोगों के खिलाफ कथित उल्लंघनों को लेकर कार्रवाई की गई। हालांकि, सिर्फ ट्रैफिक नियम तोड़ने या सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने से हर व्यक्ति का स्वतः डिपोर्ट होना एक सामान्य नियम नहीं है। किसी व्यक्ति की इमिग्रेशन स्थिति, वीजा की शर्तों, गिरफ्तारी या अन्य कानूनी परिस्थितियों के आधार पर मामला अलग हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों को व्यापक नीति के बजाय व्यक्तिगत इमिग्रेशन मामलों के रूप में देखना जरूरी है।

कनाडा में 1,500 भारतीय छात्रों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता ?

कनाडा के अल्बर्टा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) से जुड़े बदलावों ने विदेशी छात्रों के बीच चिंता बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1,500 भारतीय छात्र इससे प्रभावित हो सकते हैं। इनमें ऐसे छात्र शामिल हैं, जिन्होंने पढ़ाई के बाद कनाडा में काम करने के लिए वर्क परमिट व्यवस्था का सहारा लिया था। बदलावों के बाद छात्रों ने प्रदर्शन भी किया और अपने रोजगार तथा कनाडा में रहने की स्थिति को लेकर स्पष्टता की मांग की।

कनाडाई PM मार्क कार्नी ने क्या कहा ?

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि जिन विदेशी छात्रों के पास देश में रहने के लिए वैध वीजा या वर्क परमिट नहीं है, उन्हें कनाडा छोड़ना होगा। अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने भी विदेशी छात्रों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि स्टडी वीजा अस्थायी दस्तावेज है और विदेशी छात्र इसके आधार पर हमेशा के लिए कनाडा में रहने का अधिकार नहीं पा सकते हैं।

भारतीय छात्रों के लिए क्या है संदेश ?

अमेरिका और कनाडा में पढ़ाई या नौकरी कर रहे भारतीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि वे अपने वीजा, स्टडी परमिट, वर्क परमिट और इमिग्रेशन स्टेटस की शर्तों का पालन करें। इसके साथ ही किसी डिपोर्टेशन या वीजा रद्द होने के मामले को लेकर वायरल दावों पर भरोसा करने से पहले संबंधित सरकार, इमिग्रेशन विभाग या आधिकारिक दस्तावेजों से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।