पटना। बच्चों में पेट दर्द, गैस, भूख कम लगना, उल्टी आना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती खानपान की आदतें और जंक फूड का बढ़ता चलन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले बच्चों में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिन्हें पाचन संबंधी शिकायतें परेशान कर रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चिप्स, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स और बाहर मिलने वाला अधिक तेल-मसाले वाला भोजन बच्चों के पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डालता है। लगातार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट दर्द, गैस, अपच और भूख कम लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कई मामलों में बच्चों का स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो जाता है और वे सामान्य गतिविधियों में रुचि कम लेने लगते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को कम उम्र से ही संतुलित और पौष्टिक भोजन की आदत डालना जरूरी है। उनके दैनिक आहार में खिचड़ी, दलिया, दाल-चावल, हरी सब्जियां, दही और मौसमी फलों को शामिल किया जाना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ शरीर के विकास में भी मदद करते हैं।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बच्चों को केवल घर का खाना खिलाने से ही काम नहीं चलेगा, बल्कि माता-पिता को भी उनके साथ बैठकर स्वस्थ भोजन करने की आदत अपनानी होगी। बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। ऐसे में परिवार की खानपान की आदतें भी उनकी सेहत पर सीधा प्रभाव डालती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि खानपान में सुधार करने के बाद भी 7 से 10 दिनों तक पेट दर्द, उल्टी, गैस या भूख की समस्या बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है ताकि किसी गंभीर बीमारी की संभावना को समय रहते पहचाना जा सके।
विशेषज्ञ बच्चों को रोजाना कम से कम एक से दो घंटे शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद के लिए भी प्रोत्साहित करने की सलाह देते हैं। नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के साथ बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।




