पटना: बिहार में दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को राजधानी पटना में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए और परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर आक्रोश मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अभ्यर्थियों ने पटना कॉलेज परिसर से मार्च की शुरुआत की और विभिन्न मार्गों से होते हुए जेपी गोलंबर की ओर बढ़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक की जांच कराने की मांग उठाई।
परीक्षा प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा की पारदर्शिता प्रभावित हुई है, जिससे मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
छात्रों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी साबित होती है तो परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए।
पुलिस प्रशासन रहा अलर्ट
प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। जेपी गोलंबर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की गई।
अभ्यर्थियों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
मार्च में शामिल छात्रों का कहना था कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
अभ्यर्थियों का मानना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया ही योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय सुनिश्चित कर सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल परीक्षा रद्द करने को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। हालांकि अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता दिख रहा है। अब सभी की नजरें संबंधित आयोग और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
यदि छात्रों की मांगों पर कोई निर्णय लिया जाता है तो इसका असर भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों पर भी पड़ सकता है।




