काठमांडू: नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय के विधि संकाय सभागार में भारत-नेपाल शैक्षणिक सम्मेलन सह अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारत और नेपाल के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा, शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।

सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करना, शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश करना और शोध आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बदलते समय के साथ शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डीन प्रोजोली, डॉ. विजय प्रसाद जायसवाल, डॉ. मैनाली, डॉ. गुरु रहमान, डॉ. वाणीभूषण प्रसाद, योग गुरु धीरज, डॉ. एस. के. पांडेय, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. अंशु और कुमार सुंदरम सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों ने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को समय की आवश्यकता बताते हुए इस तरह के आयोजनों की सराहना की।

शिक्षा को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

सम्मेलन के संयोजक डॉ. एस. के. पांडेय ने स्वागत भाषण में कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का सबसे मजबूत आधार होती है। उन्होंने भारत और नेपाल के बीच शैक्षणिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को नई दिशा देने के लिए संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भी नए अवसर प्राप्त होंगे।

शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर

सम्मेलन के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शोध गतिविधियों के विस्तार, तकनीक आधारित शिक्षण प्रणाली और विद्यार्थियों के समग्र विकास जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और नवाचार से जोड़ना समय की मांग है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाना होगा।

उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षाविद हुए सम्मानित

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह भी रहा। इस दौरान शिक्षा, शोध और अकादमिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया।

सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षाविदों ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की प्रेरणा बताते हुए ज्ञान और नवाचार के प्रसार के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।

भारत-नेपाल शैक्षणिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

समारोह के समापन अवसर पर मंच के संस्थापक डॉ. सुरेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षा, नवाचार और मानवीय मूल्यों के प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रतिभागियों का मानना था कि इस प्रकार के सम्मेलन दोनों देशों के बीच शैक्षणिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए नए अवसर भी तैयार करेंगे। विशेषज्ञों ने इसे भारत-नेपाल शैक्षणिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।