पटना, 15 सितंबर। घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाले केले, सेब, संतरे और दूसरे फलों के छिलके अक्सर कूड़ेदान में चले जाते हैं। लेकिन इन्हें सही तरीके से कंपोस्ट करके पौधों के लिए उपयोगी जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे किचन वेस्ट कम करने में मदद मिलती है और घर के गमलों की मिट्टी में जैविक सामग्री भी बढ़ाई जा सकती है।
छिलकों को पहले साफ करके छोटे टुकड़ों में काटें
फलों के छिलकों को कंपोस्ट में डालने से पहले अच्छी तरह साफ कर लें। मिट्टी या गंदगी लगी हो तो पानी से धोकर सुखाएं। इसके बाद उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। छोटे टुकड़े जल्दी टूटते हैं, जिससे कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
केले, सेब और नाशपाती के साफ छिलकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। खट्टे फलों के छिलके भी डाले जा सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ डालने से बचना बेहतर है।
बाल्टी में ऐसे तैयार करें कंपोस्ट
एक पुरानी बाल्टी या कंपोस्ट कंटेनर लें। नीचे सूखे पत्ते, सूखी घास या थोड़ा सूखा कागज डालें। इसके ऊपर फलों के छिलकों की पतली परत रखें और फिर सूखी मिट्टी या सूखे पत्तों की परत डालें। इसी तरह गीली और सूखी सामग्री की परतें बनाते जाएं।
कंटेनर को पूरी तरह एयरटाइट बंद न करें। कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया में हवा का पहुंचना जरूरी होता है।
नमी का सही संतुलन रखें
मिश्रण बहुत सूखा लगे तो हल्का पानी छिड़क सकते हैं। लेकिन इसमें पानी जमा नहीं होना चाहिए। ज्यादा नमी से बदबू और सड़न की समस्या हो सकती है। हर कुछ दिनों में लकड़ी की छड़ी से सामग्री को हल्का पलटने से हवा अंदर पहुंचती रहती है।
खाद कब तैयार होगी?
कंपोस्ट तैयार होने में मौसम, नमी और सामग्री के अनुसार कई सप्ताह से कुछ महीने तक लग सकते हैं। जब मिश्रण गहरे भूरे रंग का, भुरभुरा और मिट्टी जैसा दिखाई देने लगे तथा उसमें तेज सड़ी हुई गंध न हो, तब इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
पौधों में खाद डालते समय रखें ध्यान
तैयार कंपोस्ट को सीधे पौधे की जड़ों से चिपकाकर न डालें। इसे मिट्टी की ऊपरी परत में थोड़ी मात्रा में मिलाना बेहतर है। गमले के आकार और पौधे की जरूरत के अनुसार मात्रा तय करें।
किन चीजों से बचें?
बहुत ज्यादा गीला किचन वेस्ट एक साथ न डालें। फफूंद लगा, सड़ा हुआ या स्पष्ट रूप से खराब भोजन डालने से भी बचें। सही तरीके से फलों के छिलकों की कंपोस्टिंग करके घर के कचरे को उपयोगी खाद में बदला जा सकता है और बागवानी के लिए एक सरल, घरेलू विकल्प तैयार किया जा सकता है।






