पूर्णिया, 19 अगस्त। मेरठ में कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद जांच की कड़ी अब पूर्णिया के मीरगंज गांव तक पहुंच गई है। मंगलवार को रौटा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की टीम ने जफर के पैतृक घर पहुंचकर करीब तीन घंटे तक परिवार के सदस्यों से पूछताछ की। एजेंसियां उसकी पढ़ाई, संपर्क, यात्रा और हाल की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं।

परिवार से पढ़ाई और संपर्क को लेकर पूछताछ

सुरक्षा एजेंसियों ने जफर के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से उसके बचपन से लेकर मेरठ पहुंचने तक की जानकारी ली। पूछताछ में यह जानने की कोशिश की गई कि उसने किन संस्थानों में पढ़ाई की, किन लोगों के संपर्क में रहा और घर से निकलने के बाद किन स्थानों पर गया।

मधेपुरा के रास्ते मेरठ पहुंचने की जानकारी

परिजनों के अनुसार जफर करीब 25 दिन पहले घर से निकला था। बताया गया कि वह पहले मधेपुरा गया और उसके बाद मेरठ पहुंचा। जांच एजेंसियां अब मधेपुरा में उसके ठहरने और वहां संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

मदरसे में पढ़ाई, बच्चों को पढ़ाने की भी जानकारी

बताया गया कि जफर ने शुरुआती पढ़ाई मीरगंज के मदरसे से की थी। इसके बाद बुलंदशहर के एक मदरसे में रहकर मौलवी की शिक्षा पूरी की। बाद में वह पूर्णिया के माधोपाड़ा स्थित एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने का काम करता था। एजेंसियां उसके शैक्षणिक और सामाजिक संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।

शादी के बाद पहली बार निकला था घर

परिवार के मुताबिक जफर की शादी इसी साल मई में किशनगंज जिले के बहादुरगंज क्षेत्र में हुई थी। शादी के बाद वह पहली बार करीब 25 दिन पहले घर से बाहर निकला था। इसके बाद मधेपुरा होते हुए उसके मेरठ पहुंचने की बात सामने आई है।

पासपोर्ट और वित्तीय लेन-देन की भी जांच

जफर के नाम से पासपोर्ट होने की जानकारी के बाद एजेंसियां उससे जुड़े रिकॉर्ड और संभावित यात्रा विवरण की जांच कर रही हैं। वहीं, यूपी एटीएस की कार्रवाई में उस पर संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों और प्रतिबंधित संगठन से कथित संपर्क के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

गिरफ्तारी से परिवार में चिंता का माहौल

जफर की गिरफ्तारी की खबर के बाद परिवार में चिंता का माहौल है। पूछताछ के दौरान उसके पिता की तबीयत बिगड़ने की भी बात सामने आई। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों, यात्रा और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को जोड़ने में जुटी हैं। किसी व्यक्ति की शिक्षा, भाषा या धार्मिक संस्थान से जुड़ाव मात्र से उसकी आपराधिक भूमिका तय नहीं की जा सकती। मामले में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।