गोला (रामगढ़) | 11 जुलाई 2026

झारखंड में विस्थापन, पुनर्वास और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद एवं वामपंथी नेता भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने दावा किया है कि राज्य में विभिन्न औद्योगिक, खनन और विकास परियोजनाओं के कारण अब तक करीब 45 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन होने के बावजूद आज तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के लिए प्रभावी नीति लागू नहीं हो सकी है।

गोला में कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान उठाए सवाल

शुक्रवार को बोकारो से हजारीबाग लौटते समय पूर्व सांसद गोला में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे, जहां उनका स्वागत किया गया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भूमि अधिग्रहण के दौरान भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की भावना का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, उपजाऊ कृषि भूमि पर उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

रोजगार और पुनर्वास पर सरकार से कार्रवाई की मांग

भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि बोकारो में लगभग 34 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई, लेकिन प्रभावित रैयतों को अपेक्षित रोजगार नहीं मिला। उन्होंने दुमका, गोड्डा और अन्य क्षेत्रों का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि किसानों की जमीन उद्योगों के लिए अधिग्रहित की जा रही है। उन्होंने कुछ परियोजनाओं के संदर्भ में यह भी आरोप लगाया कि निजी औद्योगिक समूहों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

26 संगठनों का संयुक्त आंदोलन जारी

पूर्व सांसद ने बताया कि राज्य के 26 सामाजिक और जनसंगठन विस्थापन, पुनर्वास और रोजगार के मुद्दे पर संयुक्त रूप से आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा विस्थापन एवं नियोजन नीति बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने राज्य सरकार से जल्द व्यापक विस्थापन एवं पुनर्वास नीति लागू करने, प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की।

इस दौरान घनेनाथ चौधरी, पोखन महतो, अजित उपाध्याय, जोगेंद्र नायक, मखीराम मुंडा, केंद्रीय महासचिव बिनोद पांडेय और अनंत कुमार आर्य सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।