देवघर, 20 अगस्त। राजकीय श्रावणी मेला के दौरान देवघर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आस्था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर इंसानियत का संदेश दिया। गुरुवार को सरस कुंज के 25 दिव्यांग और विशेष बच्चों को पहली बार हेलीकॉप्टर की सवारी कराई गई। आसमान से देवघर और बाबाधाम देखने का यह अनुभव बच्चों के लिए बेहद खास और यादगार रहा।

पहली उड़ान से पहले उत्साह और थोड़ी घबराहट

हेलीकॉप्टर में बैठने से पहले बच्चों के चेहरों पर उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। कुछ बच्चों में पहली हवाई यात्रा को लेकर सवाल और हल्की घबराहट भी नजर आई। लेकिन जैसे ही हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी, बच्चों का उत्साह देखते ही बना। उनके चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने आसमान से देवघर के नजारे देखे।

उपायुक्त की मौजूदगी में हुई विशेष पहल

इस विशेष हवाई यात्रा का आयोजन उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की मौजूदगी में कराया गया। प्रशासन की ओर से इसे संवेदनशील और मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। श्रावणी मेला के दौरान संचालित हेलीकॉप्टर सेवा आम तौर पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है, लेकिन इस बार इसका अनुभव विशेष बच्चों को भी मिला।

बच्चों के लिए सिर्फ सफर नहीं, यादगार अनुभव

सरस कुंज से जुड़े लोगों के अनुसार, बच्चों के लिए यह सिर्फ हेलीकॉप्टर यात्रा नहीं थी, बल्कि उन्हें नई दुनिया देखने और अपने सपनों को महसूस करने का अवसर भी मिला। उड़ान के बाद बच्चों में काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने इस अनुभव को यादगार बताया और आसमान से बाबाधाम को देखने की खुशी साझा की।

सरस कुंज ने जताया प्रशासन का आभार

सरस कुंज से जुड़े लोगों ने इस पहल के लिए जिला प्रशासन का आभार जताया। उनका कहना था कि समाज में खुशियों और नए अनुभवों पर हर बच्चे का समान अधिकार है। ऐसी पहल विशेष बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है।

कई अधिकारी रहे मौजूद

इस दौरान उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, नगर आयुक्त सुलोचना मीना, अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार, अंचलाधिकारी अनिल कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी रोहित कुमार विद्यार्थी सहित संबंधित दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और सरस कुंज से जुड़े लोग मौजूद रहे।

श्रावणी मेला की हजारों तस्वीरों के बीच 25 बच्चों की यह छोटी-सी हवाई यात्रा शायद सबसे बड़ी खबर न हो, लेकिन मानवीय संवेदना के नजरिए से यह पहल लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।