नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सार्वजनिक जगहों पर अनिश्चितकाल तक धरना-प्रदर्शन करने को लेकर एक अहम टिप्पणी की। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कोई भी संगठन किसी सार्वजनिक स्थान पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकता है। प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहों पर भी समय-सीमा होनी चाहिए, ताकि दूसरे संगठनों को अपनी बात रखने का मौका मिल सके। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा है कि प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी एक संगठन को लंबे समय तक एक ही जगह पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। रोजगार, व्यापार और आम लोगों की आवाजाही का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। शीर्ष कोर्ट दिल्ली में अक्टूबर में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत, निगरानी और कारोबारियों को हुए नुकसान जैसे मुद्दे शामिल हैं।

CJI सूर्यकांत बोले- हमेशा के लिए किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकते

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी संगठन किसी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक संगठन लगातार उसी जगह पर बैठा रहेगा तो किसान, पत्रकार, मजदूर और दूसरे प्रदर्शनकारी कहां जाएंगे ? कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति और संगठन को अपनी बात रखने तथा प्रदर्शन करने का अधिकार है। इसलिए प्रदर्शन स्थलों का इस्तेमाल इस तरह होना चाहिए कि सभी को समान अवसर मिल सके। इस बेंच में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।

व्यापारियों ने कहा- त्योहारों में 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान

सुनवाई के दौरान दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन के चलते दिल्ली के कई बाजारों में दुकानें बंद रहीं। त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होने से व्यापारियों को 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। रोहतगी ने कहा कि त्योहारों के समय बिक्री नहीं होने से दुकानदारों के साथ उनसे जुड़े दूसरे लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अगले दो महीने तक किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है।

CJP को एक दिन की अनुमति मिली, 17 दिन तक चला प्रदर्शन

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली पुलिस की ओर से कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए सिर्फ एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी वहां 17 दिनों तक बैठे रहे। मेहता ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति संसद की ओर मार्च भी किया। संसद देश की संप्रभुता का प्रतीक है और बिना अनुमति वहां या सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जो संगठन बंद या प्रदर्शन का आह्वान करता है, उसे उसके परिणामों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

मेनका गुरुस्वामी ने उठाया 7 हजार लोगों की हिरासत का मुद्दा

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने प्रदर्शन के दौरान सात हजार लोगों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोकतंत्र में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का असर नहीं पड़ता ? इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि इन लोगों को हिरासत में नहीं लिया गया था, बल्कि प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। दोनों पक्षों ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर अपनी-अपनी दलीलें रखीं।

प्रशांत भूषण ने पूछा- किस कानून के तहत हो रही निगरानी ?

सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने प्रदर्शनकारियों की निगरानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों पर किस तरह की निगरानी की जा रही है और इसके लिए कौन-सा कानूनी प्रावधान मौजूद है। जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान केवल CCTV कैमरों से निगरानी की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रदर्शन की लाइव रिकॉर्डिंग कर रहे थे, लेकिन सरकारी CCTV निगरानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में इन 9 मामलों पर एक साथ सुनवाई

दिल्ली में अक्टूबर में हुए CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े नौ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई थी।

  1. मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने का मामला : प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने-जाने वाली ट्रेनों पर पाबंदियां लगाने को चुनौती दी गई है।
  2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना : याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 9 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं करने के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
  3. प्रदर्शनकारियों की हिरासत : 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने और पुलिस कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
  4. वकीलों के साथ मारपीट : प्रदर्शन के दौरान वकीलों को हिरासत में लेने और पुलिस स्टेशन में उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोपों से जुड़ी याचिकाएं भी शामिल हैं।
  5. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति : याचिकाकर्ताओं ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती दी है।
  6. BNSS की धारा 163 के तहत पाबंदियां : प्रदर्शन रोकने के लिए लगाई गई निषेधाज्ञा के आधार और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
  7. रास्ते बंद करने का मामला : बैरिकेडिंग, लोगों की आवाजाही रोकने और पुलिस की ओर से लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है।
  8. पहले दिए गए अदालती आदेशों का पालन : 11 अक्टूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लेने और मेट्रो, ट्रेन तथा इंटरनेट सेवाएं सामान्य रखने से जुड़े निर्देशों के पालन का मुद्दा उठाया गया है।
  9. कारोबारियों को हुए नुकसान का मामला : व्यापारिक संगठनों ने प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने और करोड़ों रुपये के नुकसान का मुद्दा उठाया है।

दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़ी पिछली 3 सुनवाई में क्या हुआ ?

9 अक्टूबर : CJI बोले- मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं

CJP के प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था कि किसी चीज को रोकने के लिए उतनी ही कार्रवाई होनी चाहिए, जितनी जरूरी हो। उन्होंने कहा था कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

11 अक्टूबर : शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लें

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की थी। कोर्ट ने मेट्रो सेवाएं सामान्य रखने, इंटरनेट बाधित नहीं करने और लोगों की आवाजाही नहीं रोकने से जुड़े निर्देश दिए थे।

15 अक्टूबर : CJI बोले- कोई सुप्रीम कोर्ट पर दबाव नहीं बना सकता

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था कि कोई सुप्रीम कोर्ट को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशें बेकार हैं और कोर्ट को बाहर व अंदर हो रही घटनाओं की जानकारी है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी सवाल उठाने की बात कही थी।