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शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम, एक छोटी गलती भी कर सकती है पूजा का फल कम
सावन में भगवान शिव की पूजा के दौरान बेलपत्र अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। शिवपुराण के अनुसार बेलपत्र चढ़ाने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। जानें बेलपत्र का धार्मिक महत्व और सही विधि।
Sapna Kashyap
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नई दिल्ली | 1 अगस्त 2026
सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से बेलपत्र चढ़ाने पर महादेव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। हालांकि, शिवपुराण में बेलपत्र अर्पित करने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना गया है।
भगवान शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र?
शिवपुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनका शरीर और मस्तिष्क अत्यधिक गर्म हो गया। तब देवताओं ने शिवजी पर जलाभिषेक किया और शीतल तासीर वाले बेलपत्र अर्पित किए। मान्यता है कि इससे भगवान शिव को शीतलता मिली। तभी से बेलपत्र शिव पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अर्पण माना जाता है।
बेलपत्र चढ़ाते समय रखें इन बातों का ध्यान
शिवलिंग पर हमेशा बिना कटे-फटे, साफ और ताजे बेलपत्र ही चढ़ाएं। बेलपत्र में कम से कम तीन पत्तियां होना शुभ माना जाता है। सोमवार और चतुर्थी तिथि के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। आवश्यकता होने पर एक दिन पहले तोड़े गए बेलपत्र भी उपयोग किए जा सकते हैं।
शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा विषम संख्या—जैसे 3, 5, 7, 11 या 21—में अर्पित करें। साथ ही बेलपत्र इस प्रकार रखें कि उसका चिकना भाग ऊपर और खुरदरा भाग शिवलिंग की ओर रहे। गंदे या सूखे बेलपत्र अर्पित करने से बचना चाहिए।
सावन में बेल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन महीने में बेल वृक्ष की जड़ में घी का दीपक जलाकर पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए शिव पूजा के साथ बेल वृक्ष का सम्मान भी विशेष फलदायी माना गया है।