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सावन पुत्रदा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय
सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। जानें 2026 में एकादशी की तिथि, पूजा के शुभ समय, व्रत की विधि और पारण से जुड़ी जरूरी जानकारी।
Sapna Kashyap
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नई दिल्ली, 14 अगस्त। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को संतान सुख की कामना रखने वाले भक्त विशेष श्रद्धा से रखते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी
23 अगस्त से शुरू होगी एकादशी तिथि
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी की तिथि 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। एकादशी व्रत और पूजा का समय शहर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
पूजा के लिए ये समय माने जा रहे शुभ
श्रावण पुत्रदा एकादशी पर सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:30 से 5:15 बजे, अमृत काल सुबह 7:03 से 8:51 बजे और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12:50 बजे तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार इन समयों में अंतर हो सकता है।
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर पीले फूल, फल, पंचामृत, धूप, दीप और तुलसी पत्र अर्पित करें। इसके बाद विष्णु मंत्रों का जाप करें और पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
अगले दिन करें व्रत का पारण
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। दिए गए विवरण के अनुसार 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक पारण का समय बताया गया है। हालांकि पारण का सटीक समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए व्रत रखने वाले अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय जरूर जांचें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण पुत्रदा एकादशी पर श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान सुख और परिवार की मंगलकामना का आशीर्वाद प्राप्त होता है।