नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026 : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में अमेरिका के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखना बहुत जरूरी है। रूबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद राजनयिक संबंध बनाए रखना विदेश नीति का हिस्सा है। एक इंटरव्यू में रूबियो ने अमेरिका की पाकिस्तान नीति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखने का उद्देश्य मतभेदों के बीच भी बातचीत के रास्ते खुले रखना है। उनके मुताबिक, कूटनीति में कई बार ऐसे देशों से भी संवाद करना पड़ता है, जिनकी नीतियों से सहमति नहीं होती है।
पाकिस्तान से बातचीत भारत की सुरक्षा के लिए भी अहम : रूबियो
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत काफी चिंतित रहता है। अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो के मुताबिक पाकिस्तान के साथ बातचीत करने का एक उद्देश्य उन मुद्दों पर प्रभाव डालना भी है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं। हालांकि, उनके बयान का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को लेकर अपनी सभी चिंताओं को समाप्त मान लिया है।
भारत और ईरान के रिश्तों का दिया उदाहरण
अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने तर्क को समझाने के लिए भारत और ईरान के संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद राजनयिक संपर्क बनाए रखना जरूरी हो सकता है। रूबियो के इस बयान का मुख्य संदेश यह था कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल सहमति या असहमति के आधार पर नहीं चलते। भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा, आर्थिक हित और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कारक भी देशों की विदेश नीति को प्रभावित करते हैं।
ईरान के नेतृत्व पर रूबियो ने उठाए सवाल
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान की सरकार और उसके नेतृत्व की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने विशेष रूप से उन कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं की आलोचना की, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे धार्मिक विचारधारा से प्रेरित होकर फैसले लेते हैं। रूबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सभी शिया धर्मगुरुओं के बारे में नहीं, बल्कि ईरान के नेतृत्व में मौजूद कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों के संदर्भ में थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री सुरक्षा पर चिंता
मार्को रूबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ईरान पर ऐसे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिनका संघर्ष से सीधा संबंध नहीं है। रूबियो के मुताबिक, इस तरह के हमलों से जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की जान खतरे में पड़ती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री व्यापार को निशाना बनाने वाली गतिविधियों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने व्यापारिक जहाजों पर हमलों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन पनडुब्बियों की ओर से किए गए हमलों से भी की। यह तुलना रूबियो के बयान का हिस्सा थी।
होर्मुज से तेल आपूर्ति पर आंकड़ों में विरोधाभास
मार्को रूबियो ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही जारी है और आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तर के करीब बनी हुई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में दिए गए एक अन्य आंकड़े में 20 अक्टूबर को तेल टैंकरों की आवाजाही में लगभग 99 प्रतिशत गिरावट का दावा किया गया है। दोनों दावों के बीच स्पष्ट अंतर है। इसलिए जहाजों की वास्तविक संख्या और तेल आपूर्ति की स्थिति को स्वतंत्र तथा विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित किए बिना किसी एक आंकड़े को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
मार्को रूबियो ने समुद्री जहाजों पर हमलों के संदर्भ में भारतीय नाविकों की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं, इसलिए जहाजों पर होने वाले हमलों का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से जहाजों की रक्षा करने में जुटा है। उनके मुताबिक, कई हमलों को रास्ते में ही रोक दिया जाता है, लेकिन कुछ हमले नुकसान पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। भारतीय नाविकों की मौत और लापता लोगों की संख्या से संबंधित आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इस रिपोर्ट में इन आंकड़ों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए।
ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने के पक्ष में अमेरिका
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम नागरिकों की स्थिति सुधारने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल तथा ड्रोन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार, ईरान के इन कार्यक्रमों और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर वॉशिंगटन अपनी सख्त नीति जारी रखना चाहता है।
रूबियो के बयान से क्या संकेत मिलते हैं ?
मार्को रूबियो के बयान से अमेरिका की विदेश नीति के तीन प्रमुख पहलू सामने आते हैं।
- पाकिस्तान से संवाद : अमेरिका परमाणु हथियारों और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने को महत्वपूर्ण मानता है।
- भारत की सुरक्षा : रूबियो ने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद कर सकती है, जिनसे भारत चिंतित है।
- ईरान पर दबाव : अमेरिका समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर ईरान की आलोचना कर रहा है और उस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के पक्ष में है।
कुल मिलाकर, विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बयान दिखाता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने को अपनी क्षेत्रीय कूटनीति का हिस्सा मानता है। साथ ही, ईरान के साथ तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा भी अमेरिकी विदेश नीति के महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।




