बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•
नाग पंचमी पर महादेव के साथ नाग देवता की पूजा, सावन सोमवार के महासंयोग में जानें पूजा विधि और महत्व | Diarch News
नाग पंचमी पर महादेव के साथ नाग देवता की पूजा, सावन सोमवार के महासंयोग में जानें पूजा विधि और महत्व
Naag Panchami 2026: 17 अगस्त 2026 को सावन के तीसरे सोमवार के साथ नाग पंचमी का विशेष संयोग बना है। जानिए भगवान शिव और नाग देवता की पूजा विधि, शुभ मान्यताएं और कालसर्प दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
Sapna Kashyap
1 व्यू
Share
देवघर, 17 अगस्त। सावन के तीसरे सोमवार के दिन इस बार नाग पंचमी का भी विशेष संयोग बना है। 17 अगस्त 2026, सोमवार को एक ओर जहां भक्त भगवान शिव की आराधना और रुद्राभिषेक कर रहे हैं, वहीं नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा भी की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं में सावन सोमवार और नाग पंचमी के इस संयोग को विशेष महत्व दिया जाता है।
शिव पूजा के साथ नाग देवता की आराधना
सनातन परंपरा में नाग देवता का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग को शिव के प्रमुख प्रतीकों में शामिल किया जाता है। इसी मान्यता के चलते नाग पंचमी पर शिवलिंग के पूजन के साथ नाग देवता की आराधना भी की जाती है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. एन.के. बेरा के अनुसार, धार्मिक मान्यता में इस दिन भगवान शिव और नाग देवता को जल तथा कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है। कुछ श्रद्धालु राहु-केतु और कालसर्प दोष से जुड़ी मान्यताओं के चलते भी विशेष पूजा करते हैं। हालांकि, इन ज्योतिषीय प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
नाग पंचमी पर ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान करने के बाद व्रत या पूजा का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करें। पूजा स्थल पर नाग देवता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर जल, कच्चा दूध, रोली, चंदन, अक्षत, फूल और धान का लावा अर्पित किया जाता है।
पूजा के दौरान श्रद्धालु 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर सकते हैं। नाग देवता की आराधना के बाद खीर और पूरी का भोग लगाने की भी परंपरा है। अंत में आरती कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
शिव-नाग पूजा को क्यों माना जाता है खास?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और नाग देवता का संबंध अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसलिए सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना भक्तों के लिए विशेष अवसर माना जा रहा है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और नाग देवता की पूजा करते हैं।
कालसर्प दोष को लेकर क्या है मान्यता?
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को राहु-केतु और कालसर्प दोष से संबंधित पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, किसी भी दोष या उसके प्रभाव को लेकर व्यक्तिगत निष्कर्ष निकालने के बजाय योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। पूजा-पाठ मुख्य रूप से श्रद्धा और धार्मिक आस्था का विषय है।