नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में इसी महीने बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। संगठन में बदलाव के बाद अब केंद्र सरकार में भी जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा किए जाने की चर्चा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दो दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों का कामकाज कम किया जा सकता है, जबकि कुछ चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। हालांकि इन संभावित बदलावों को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सामने आ रही जानकारियों को तो फिलहाल राजनीतिक सूत्रों और चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है।
किन मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा ?
भाजपा के नए संगठनात्मक बदलाव के बाद सरकार में भी जिम्मेदारियों को लेकर मंथन की चर्चा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का कोषाध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि वह मंत्री पद पर बने रह सकते हैं। वाणिज्य मंत्री के तौर पर व्यापार समझौतों और अमेरिका के साथ बातचीत में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं हैं। NEET विवाद के बाद शिक्षा मंत्री के पद से उनके इस्तीफे की बात सामने आई थी। अब उनके किसी दूसरे मंत्रालय के साथ सरकार में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हरदीप पुरी को लेकर भी सवाल
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होने वाला है। उनके दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अगर उन्हें दोबारा नामांकन नहीं मिलता है, तो मंत्री पद को लेकर भी स्थिति बदल सकती है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार में फिलहाल मौजूद सिख प्रतिनिधित्व पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संभावना को लेकर भी चर्चा है। राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम संभावित चेहरों में बताया जा रहा है।
दक्षिण भारत पर भी नजर
भाजपा संगठन में दक्षिण भारत को अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार में क्षेत्रीय संतुलन साधने पर भी जोर दिए जाने की संभावना है। फिलहाल दक्षिण भारत से केंद्र में करीब 10 मंत्री होने की बात कही जा रही है, जिनमें कैबिनेट और राज्य मंत्री दोनों शामिल हैं। ऐसे में संभावित फेरबदल में दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
सहयोगी दलों की मांग से बढ़ सकती है हलचल
मोदी सरकार में संभावित फेरबदल के बीच NDA के सहयोगी दलों की मांग भी महत्वपूर्ण हो सकती है। लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से बड़ी जिम्मेदारी की मांग कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से भी एक और कैबिनेट पद की मांग की चर्चा है। महाराष्ट्र में शिवसेना के पास 13 लोकसभा सांसद होने का भी राजनीतिक महत्व है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच इस मुद्दे पर बातचीत होने की बात भी सामने आई है।
DMK की केंद्र में एंट्री की चर्चा
तमिलनाडु की राजनीति भी संभावित कैबिनेट फेरबदल में अहम भूमिका निभा सकती है। रिपोर्टों में DMK को केंद्र सरकार में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह NDA की राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में भी अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
UP चुनाव को देखते हुए बदल सकता है समीकरण
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के लिए राज्य का राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बेहद महत्वपूर्ण है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश से कुछ बड़े चेहरों को केंद्र में लाने की चर्चा भी चल रही है। केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र सरकार में जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें हैं। दोनों ही उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। अमरपाल मौर्य को भाजपा के ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी मिलने के बाद केशव प्रसाद मौर्य के नाम की चर्चा और तेज हुई है। हालांकि, ब्रजेश पाठक को भी संभावित विकल्प माना जा रहा है।
हिमाचल से अनुराग ठाकुर व जेपी नड्डा के नाम
हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर दोनों ही भाजपा के बड़े चेहरे हैं। आगामी राजनीतिक और चुनावी जरूरतों को देखते हुए दोनों में से किसी की भूमिका में बदलाव को लेकर भी अटकलें हैं। कुल मिलाकर संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल में मंत्रियों के विभागों में बदलाव, सहयोगी दलों को अधिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और आगामी चुनावों की रणनीति अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से कैबिनेट फेरबदल की तारीख या मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।




