नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 : भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और अगले महीने नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 का आयोजन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के इस सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी है। BRICS के विस्तार के बाद संगठन का वैश्विक आर्थिक प्रभाव और बढ़ा है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के जुड़ने से यह मंच दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण समूह बन गया है। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या BRICS अमेरिकी Dollar के दबदबे को चुनौती दे सकता है ?

Dollar को चुनौती देने की कितनी ताकत रखता है BRICS ?

अमेरिकी Dollar दशकों से वैश्विक व्यापार, विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। मगर अमेरिकी प्रतिबंधों और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच कई देश De-dollarization यानी Dollar पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। BRICS देश आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। भारत-रूस, भारत-UAE और चीन-रूस के बीच व्यापार में स्थानीय करेंसी के इस्तेमाल के उदाहरण सामने आए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि Dollar को अचानक वैश्विक व्यवस्था से हटाना आसान नहीं है। BRICS फिलहाल Dollar की जगह लेने से ज्यादा Multi-Currency World की दिशा में बदलाव को गति दे सकता है।

BRICS Pay पर ईरान का जोर

BRICS के नए सदस्य ईरान का रुख इस मामले में सबसे ज्यादा आक्रामक माना जा रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा ईरान चाहता है कि BRICS जल्द से जल्द एक ऐसा भुगतान नेटवर्क तैयार करे, जो Dollar और पश्चिमी वित्तीय सिस्टम पर निर्भर न हो। ईरान की ओर से BRICS Pay, डिजिटल भुगतान, Cryptocurrency व Central Bank Digital Currency यानी CBDC जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हालांकि भारत किसी भी ऐसे अभियान का हिस्सा बनने से बचना चाहता है जिसे सीधे तौर पर Anti-Dollar या Anti-West के रूप में देखा जाए।

भारत के लिए ईरान क्यों महत्वपूर्ण ?

भारत के लिए ईरान केवल BRICS का सदस्य नहीं है। दोनों देशों के संबंधों में ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार पोर्ट और मध्य एशिया तक कनेक्टिविटी जैसे कई रणनीतिक मुद्दे जुड़े हैं। ऐसे में भारत के सामने एक कठिन संतुलन है। उसे रूस, चीन व ईरान के Dollar से दूरी बनाने वाले रुख के बीच अपनी स्थिति बनाए रखनी है, वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मजबूत आर्थिक व रणनीतिक रिश्तों को भी आगे बढ़ाना है। यही वजह है कि BRICS Summit भारत की Diplomatic Strategy के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या BRICS पर चीन का बढ़ रहा है प्रभाव ?

BRICS के भीतर चीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वह लंबे समय से अपनी मुद्रा Yuan को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन चाहता है कि वैश्विक व्यापार में Dollar के विकल्प के तौर पर Yuan की भूमिका बढ़े। इसके अलावा चीन BRICS को अमेरिका और पश्चिमी देशों के मुकाबले एक मजबूत रणनीतिक मंच के रूप में भी देखता है। मगर भारत इस दिशा में सतर्क रहा है। नई दिल्ली का जोर इस बात पर रहा है कि BRICS को 'पश्चिम-विरोधी' मंच के बजाय 'गैर-पश्चिमी' सहयोग मंच के रूप में विकसित किया जाए।

भारत के सामने सबसे बड़ा मौका क्या है ?

भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता केवल एक कूटनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का बड़ा अवसर भी है। अगर BRICS के सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाते हैं, डिजिटल भुगतान नेटवर्क को बेहतर तरीके से जोड़ते हैं, New Development Bank को मजबूत करते हैं और आपसी व्यापार को बढ़ावा देते हैं, तो वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बदलाव की शुरुआत हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी Dollar तुरंत खत्म हो जाएगा। बदलाव धीरे-धीरे होगा और इसमें कई साल लग सकते हैं।

BRICS Summit पर क्यों टिकी हैं दुनिया की नजरें ?

आगामी BRICS Summit में सिर्फ आर्थिक मुद्दे ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और बदलती शक्ति-समीकरणों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। एक तरफ चीन Yuan को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, दूसरी ओर ईरान BRICS Pay जैसे विकल्पों की मांग कर रहा है। रूस भी Dollar आधारित वित्तीय व्यवस्था से दूरी बनाने का समर्थक रहा है। इन सबके बीच भारत की चुनौती साफ है—BRICS को मजबूत करना, लेकिन उसे किसी एक देश या किसी एक मुद्रा के प्रभाव में जाने से रोकना। इसलिए नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि आने वाली वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की दिशा तय करने वाला अहम मंच बन सकता है।