नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026 : भारत की वायु शक्ति को मजबूत करने की दिशा में Rafale F5 को लेकर चर्चा काफी तेज है। फ्रांस इस नए वैरिएंट को सिर्फ एक आधुनिक फाइटर जेट के तौर पर नहीं, बल्कि AI और ड्रोन से लैस ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ के रूप में विकसित कर रहा है। इसकी तकनीक चीन के J-20 जैसे स्टील्थ फाइटर के खिलाफ भारत की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे भारत की सैन्य ताकत कई गुणा बढ़ जाएगी।

Rafale F5 में क्या होगा खास ?

Rafale F5 को मौजूदा राफेल से कहीं अधिक उन्नत 4.5-जेनरेशन फाइटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत होगी मानवरहित ड्रोन के साथ मिलकर ऑपरेशन करने की क्षमता। फ्रांस की योजना के मुताबिक Rafale F5 कई ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन को निर्देश दे सकेगा। ये ड्रोन आगे जाकर निगरानी, लक्ष्य की पहचान और जरूरत के मुताबिक हमले जैसे मिशन में मदद कर सकते हैं। इससे पायलट वाले फाइटर को दुश्मन के बेहद करीब जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे कठिन से कठिन टारगेट हिट करने में बहुत आसानी होगी।

J-20 के खिलाफ कैसे काम करेगा ?

चीन का J-20 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी कम रडार दृश्यता मानी जाती है। Rafale F5 का मुकाबला जरूरी नहीं कि सीधे स्टील्थ विमान से आमने-सामने हो। इसके बजाय ड्रोन और सेंसर का नेटवर्क दुश्मन के विमान या ठिकाने का पता लगाने में काफी मदद कर सकता है। Rafale F5 दूर से ही पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करते हुए अपने पायलट को अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी पर रख सकता है। यानी इसकी रणनीति ‘फाइटर बनाम फाइटर’ के बजाय ‘फाइटर प्लस ड्रोन नेटवर्क’ पर आधारित होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है Rafale F5 ?

भारत चीन की बढ़ती एयर पावर को देखते हुए अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। MRFA यानी Multi Role Fighter Aircraft योजना के तहत 114 नए लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद पर चर्चा होती रही है। इसी संदर्भ में एडवांस्ड Rafale F5 को लेकर भी दिलचस्पी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत शुरुआती तौर पर 24 Rafale F5 विमानों को शामिल करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, इस संभावित खरीद को अंतिम सौदा मानना जल्दबाजी होगी।

‘लॉयल विंगमैन’ बदल सकता है युद्ध का तरीका

Rafale F5 की खासियत सिर्फ उसका हथियार या इंजन नहीं, बल्कि मानवरहित सिस्टम के साथ उसका नेटवर्क होगा। ऐसे ड्रोन दुश्मन की निगरानी कर सकते हैं और फाइटर जेट को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। इस तरह भविष्य के हवाई युद्ध में एक पायलट वाला विमान अकेले लड़ने के बजाय कई मानवरहित प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर काम कर सकता है।

फ्रांस की 2030 के बाद की तैयारी

फ्रांस Rafale F5 को भविष्य की युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार फ्रांसीसी वायुसेना में इसके 2030-2033 के बीच शामिल होने की योजना बताई गई है।भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चीन के पास J-20 जैसे स्टील्थ फाइटर मौजूद हैं और क्षेत्र में एयर पावर का संतुलन लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। हालांकि, यह कहना अभी सही नहीं होगा कि Rafale F5 अकेले J-20 की ‘टेंशन खत्म’ कर देगा। वास्तविक क्षमता विमान, सेंसर, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, ड्रोन नेटवर्क और ऑपरेशनल परिस्थितियों के संयुक्त प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।