नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026
बिहार के बांकीपुर और मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन पर चर्चा तेज हो गई है। दोनों राज्यों में टिकट वितरण के बाद सामने आए घटनाक्रम ने पार्टी की रणनीति और स्थानीय संगठन के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपचुनावों में स्थानीय समीकरण सबसे अहम भूमिका निभाते हैं और उम्मीदवार चयन चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित करता है।
बांकीपुर में उम्मीदवार बदलने से बढ़ी चर्चा
बिहार की बांकीपुर सीट पर भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) को उम्मीदवार बनाया था। नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।
दतिया में टिकट को लेकर असंतोष
मध्यप्रदेश की दतिया सीट पर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों की नाराजगी सामने आई। स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और संगठन के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरें भी सामने आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव में ऐसे असंतोष का असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।
स्थानीय समीकरण होंगे निर्णायक
विशेषज्ञों का कहना है कि उपचुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों की तुलना में उम्मीदवार की छवि, सामाजिक समीकरण और संगठन की एकजुटता अधिक प्रभाव डालती है। ऐसे में बिहार और मध्यप्रदेश के ये दोनों उपचुनाव केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक प्रबंधन की भी अहम परीक्षा माने जा रहे हैं।




