औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले में सरकारी स्कूलों में नामांकन और ऑनलाइन डेटा अपडेट को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय समीक्षा के दौरान कक्षा-1 में नामांकन और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की जानकारी दर्ज करने में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद कई विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

जानकारी के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के बावजूद कई विद्यालयों ने कक्षा-1 में नामांकित बच्चों का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं किया। इसे प्रशासन ने शिक्षा व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही माना है।

54 प्रधान शिक्षकों का तीन दिन का वेतन काटने का आदेश

जांच में अनियमितता पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने 54 प्रधान शिक्षकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके तीन दिन के वेतन की कटौती का आदेश जारी किया है। विभाग का मानना है कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आवश्यक कार्य समय पर पूरा नहीं किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में नामांकन और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया शिक्षा विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

261 विद्यालयों से मांगा गया स्पष्टीकरण

विभाग ने केवल वेतन कटौती तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। जिले के 261 विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। संबंधित शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो विभाग आगे भी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर डेटा अपडेट करना क्यों जरूरी?

ई-शिक्षाकोष पोर्टल राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण डिजिटल व्यवस्था है, जिसके माध्यम से छात्रों की शैक्षणिक जानकारी, नामांकन और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किए जाते हैं। इससे शिक्षा विभाग को विद्यालयों की वास्तविक स्थिति और छात्र संख्या की सटीक जानकारी मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा अपडेट नहीं होने से सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक प्रबंधन पर भी असर पड़ सकता है।

अधिकारियों ने दिए सख्त निर्देश

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि नामांकन और डेटा अपडेट से जुड़े लंबित कार्यों को जल्द पूरा किया जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पारदर्शी और प्रभावी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी जारी रहेगी।

शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की पहल

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को विद्यालयों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे स्कूल स्तर पर कार्यों के प्रति गंभीरता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।