आरा | 08 जुलाई 2026

भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (बीएचआरसी) ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया है। आयोग ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 निर्धारित की है। साथ ही मृतक के परिजनों को अंतरिम राहत के रूप में मुआवजा देने पर विचार करने का निर्देश भी दिया गया है।

जांच पूरी होने तक बढ़ाया गया समय

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने आयोग को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और न्यायिक जांच भी पूरी नहीं हुई है। इसी आधार पर सरकार ने अतिरिक्त समय की मांग की थी। आयोग ने इसे स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष आने से पहले राज्य की कानूनी जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा।

परिजनों को अंतरिम राहत देने का निर्देश

बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18(सी) का हवाला देते हुए राज्य सरकार से मृतक के स्वजनों को अंतरिम मुआवजा देने पर विचार करने को कहा है। हालांकि आयोग ने मुआवजे की कोई निश्चित राशि तय नहीं की है और यह निर्णय सरकार के विवेक पर छोड़ दिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम सहायता जांच या अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेगी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का है। पुलिस को 16 जून को सूचना मिली थी कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार है। कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी का पिस्टल लहराते हुए एक वीडियो भी सामने आया था। इसके अगले दिन यानी 17 जून को पुलिस के कथित एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उस पर गोली चलाई। इस मामले में उसकी मां आशा देवी ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है।

न्यायिक जांच भी जारी

राज्य सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पटना हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। अब सभी पक्षों की नजर 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।