नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

भारत सरकार की आय का बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है। जहां आम नागरिक आयकर (Income Tax) देते हैं, वहीं बड़ी कंपनियां कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax) के जरिए सरकारी खजाने में महत्वपूर्ण योगदान करती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के आंकड़ों के अनुसार, देश की सबसे बड़ी कॉरपोरेट टैक्स देने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज रही है।

रिलायंस ने चुकाया सबसे ज्यादा टैक्स

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने FY26 में ₹42,387 करोड़ का कॉरपोरेट टैक्स अदा किया। कंपनी कई वर्षों से इस सूची में शीर्ष स्थान पर बनी हुई है। बाजार पूंजीकरण के साथ-साथ टैक्स भुगतान के मामले में भी रिलायंस देश की सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है।

ये हैं देश की टॉप कॉरपोरेट टैक्स देने वाली कंपनियां

रिलायंस के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) दूसरे स्थान पर रहा, जिसने ₹30,729.20 करोड़ का टैक्स चुकाया। तीसरे स्थान पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने ₹26,198.57 करोड़, जबकि HDFC Bank ने ₹26,115.48 करोड़ का कॉरपोरेट टैक्स जमा किया। ICICI Bank ने ₹23,112.48 करोड़ के साथ पांचवां स्थान हासिल किया।

इसके अलावा भारती एयरटेल ने ₹18,477.50 करोड़, बजाज फिनसर्व ने ₹17,082.18 करोड़, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) ने ₹16,948.73 करोड़ और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने ₹16,277 करोड़ का टैक्स सरकार को दिया।

सरकारी राजस्व में बड़ी कंपनियों की अहम भूमिका

कॉरपोरेट टैक्स सरकार के लिए राजस्व का प्रमुख स्रोत माना जाता है। इसी राशि से सड़क, रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और अन्य सार्वजनिक विकास योजनाओं के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग, ऊर्जा, आईटी और टेलीकॉम सेक्टर की बड़ी कंपनियां देश की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी कंपनियों द्वारा अधिक टैक्स भुगतान यह संकेत देता है कि उनका कारोबार मजबूत बना हुआ है। इससे सरकार की आय बढ़ती है, निवेश को बढ़ावा मिलता है और देश के विकास कार्यों को गति मिलती है। कॉरपोरेट टैक्स में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।