नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026

पिछले एक वर्ष में वैश्विक शेयर बाजारों ने भारतीय बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। अमेरिका, ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख विदेशी बाजारों में आई तेजी का सीधा लाभ अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंडों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को मिला है। कई इंटरनेशनल फंड्स ने 50 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया, जबकि कुछ योजनाओं ने 80 प्रतिशत से भी ज्यादा लाभ दर्ज किया है।

83% तक का शानदार रिटर्न

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एडलवाइस इमर्जिंग मार्केट्स अपॉर्चुनिटीज इक्विटी ऑफशोर फंड ने पिछले एक साल में करीब 83.18 प्रतिशत का रिटर्न देकर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा चीन, उभरते बाजारों और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर आधारित कई फंड भी शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। हालांकि इनमें से कई योजनाओं में फिलहाल केवल सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से ही नया निवेश स्वीकार किया जा रहा है।

विदेशी बाजार क्यों बने आकर्षण का केंद्र?

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में भारतीय बाजार अपेक्षाकृत कमजोर रहा, जबकि तकनीक आधारित वैश्विक सूचकांकों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। नैस्डैक इंडेक्स में लगभग 39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि ताइवान सहित कई उभरते बाजारों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। इसका सीधा असर इंटरनेशनल म्यूचुअल फंडों के रिटर्न पर दिखाई दिया।

निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने का बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन निवेशकों को फंड की निवेश नीति, जोखिम, मुद्रा विनिमय (करेंसी) का प्रभाव और निवेश संबंधी प्रतिबंधों को समझकर ही फैसला लेना चाहिए। केवल अधिक रिटर्न देखकर निवेश करना उचित नहीं माना जाता।