नागपुर | 10 जुलाई 2026
देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल लोन फ्रॉड के बीच नागपुर पुलिस की साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित इंस्टेंट लोन ऐप 'मस्त मनी' (Mast Money) से जुड़े लगभग ₹200 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में भोपाल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने ऐसा मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया था, जिसके जरिए लोगों को कुछ ही मिनटों में लोन देने का लालच दिया जाता था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस ऐप के माध्यम से लाखों लोगों का निजी डेटा हासिल कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था और तय रकम से कई गुना अधिक वसूली की जाती थी।
शिकायत के बाद खुला पूरा नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक नागपुर के दो पीड़ितों की शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर भोपाल निवासी कामिल सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी 'मस्त मनी' ऐप के विकास से जुड़ा था। सोशल मीडिया और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए लोगों को ₹15,000 तक का तत्काल लोन देने का दावा किया जाता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क ने करीब 5 लाख लोगों को निशाना बनाया।
ऐसे होता था कथित लोन फ्रॉड
पुलिस जांच के अनुसार, ऐप डाउनलोड करते समय यूजर्स से कॉन्टैक्ट, स्टोरेज, कैमरा और अन्य संवेदनशील परमिशन ली जाती थीं। इसके बाद ऐप कथित तौर पर मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच बना लेता था। आरोप है कि मामूली लोन देने के बाद लोगों से ₹25,000 से ₹50,000 तक वसूले जाते थे। भुगतान नहीं करने पर पीड़ितों के रिश्तेदारों और परिचितों को फोन करने, निजी तस्वीरें और जानकारी सार्वजनिक करने जैसी धमकियां देकर ब्लैकमेल किया जाता था।
पुलिस कई पहलुओं की कर रही जांच
साइबर सेल अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं, ₹200 करोड़ के लेनदेन की राशि कहां गई और क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों या विदेशों से जुड़े हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कितने लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचा है। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर तय होंगे।
ऑनलाइन लोन लेते समय बरतें सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल RBI से अधिकृत बैंक या NBFC से ही लोन लेना सुरक्षित है। किसी भी अनजान ऐप को कॉन्टैक्ट, गैलरी या मैसेज की अनुमति देने से बचें। ऐप डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर, रिव्यू और रेटिंग की जांच अवश्य करें। यदि किसी ऐप से धमकी मिले या डेटा का दुरुपयोग हो रहा हो, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। डिजिटल युग में निजी डेटा की सुरक्षा ही सबसे बड़ी सुरक्षा मानी जाती है।




