नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने अपनी इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का जोरदार बचाव किया है। सरकार का कहना है कि यदि देश E20 पेट्रोल से पीछे हटकर दोबारा E10 प्रणाली अपनाता है, तो इथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे में किया गया हजारों करोड़ रुपये का निवेश प्रभावित हो सकता है। साथ ही किसानों, सहकारी संस्थाओं और वित्तीय संस्थानों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सरकार ने अफवाहों को बताया बेबुनियाद

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने, फ्यूल टैंक में जंग लगने, रबर पाइप खराब होने और इंजन सीज होने जैसी बातें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, केवल कुछ वाहनों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन इससे इंजन को स्थायी नुकसान पहुंचने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।

एक लाख करोड़ रुपये का निवेश दांव पर

सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी बैंकों ने इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए हर वर्ष करीब एक लाख करोड़ रुपये तक का वित्तपोषण किया है। यदि अब E20 नीति वापस ली जाती है, तो यह पूरा निवेश संकट में पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय नीति पर भरोसा कर किसानों, उद्यमियों और उद्योगों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

क्यों नहीं मिलेगा E10 और E20 चुनने का विकल्प?

सरकार ने यह सुझाव भी खारिज कर दिया कि उपभोक्ताओं को E10, E20 और शुद्ध पेट्रोल में से विकल्प दिया जाए। मंत्रालय का कहना है कि अलग-अलग ग्रेड के पेट्रोल की सप्लाई और वितरण से लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज, इन्वेंट्री प्रबंधन और परिचालन लागत में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे पूरी ईंधन आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

किसानों और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का जोर

मंत्रालय ने बताया कि सरकार इथेनॉल की खरीद ऐसी कीमतों पर करती है जिससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिल सके। वर्तमान में C-मोलासेस से बने इथेनॉल की कीमत ₹57.97 प्रति लीटर और मक्के से बने इथेनॉल की कीमत ₹71.86 प्रति लीटर तय की गई है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।