भागलपुर, 20 अगस्त 2026 : बिहार के भागलपुर में एक अधिवक्ता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के तरीके को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तातारपुर थाना पुलिस ने समाहरणालय के मुख्य गेट के पास अधिवक्ता सुबोध कृष्ण दास को हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, वह एक मामले में पिछले 13 साल से फरार चल रहे थे। हिरासत के दौरान अधिवक्ता को कथित तौर पर काले कोट में घसीटकर पुलिस वाहन तक ले जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद जिला विधिक संघ ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।
कोर्ट गेट के पास मिली थी अधिवक्ता के होने की सूचना
पुलिस के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि सुबोध कृष्ण दास न्यायालय गेट के पास मौजूद हैं। इसके बाद तातारपुर थाना की टीम मौके पर पहुंची और उन्हें हिरासत में लेने की कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि इसी दौरान पुलिस व अधिवक्ता के बीच खींचतान की स्थिति बनी और उन्हें कथित तौर पर घसीटकर ले जाया गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी इसकी चर्चा शुरू हो गई।
काले कोट में घसीटने पर जिला विधिक संघ नाराज
अधिवक्ता की हिरासत के तरीके पर जिला विधिक संघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के महासचिव अंजनी कुमार दुबे ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी अधिवक्ता के खिलाफ मामला दर्ज है तो कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अधिवक्ता को काले कोट में घसीटकर ले जाया गया, वह आपत्तिजनक है। संघ का कहना है कि पुलिस को कार्रवाई से पहले संघ को भी जानकारी देनी चाहिए थी, ताकि मामले में सहयोग किया जा सके।
स्थानीय लोगों ने भी रखी अलग राय
वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अधिवक्ता वास्तव में किसी मामले में लंबे समय से फरार थे तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। पुलिस को फरार आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार है। हालांकि, लोगों का यह भी कहना है कि गिरफ्तारी का अधिकार होने के बावजूद कार्रवाई का तरीका कानून और सम्मानजनक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई पर अब उठ रहे सवाल
फिलहाल अधिवक्ता को हिरासत में लेने की कार्रवाई और कथित तौर पर घसीटकर ले जाने को लेकर विवाद जारी है। पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर है कि भागलपुर जिला विधिक संघ और पुलिस के बीच इस मामले को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।




