पटना, 27 अक्टूबर 2026 : बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की जांच अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री से जुड़े मामले में सात IAS अधिकारियों को समन जारी किया है। अब इनसे पूछताछ की जाएगी। पटना हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रवर्तन ED ने कार्रवाई तेज कर दी है। इन अधिकारियों से कथित संपर्क और टेंडर प्रक्रिया में उनकी संभावित भूमिका को लेकर पूछताछ की जानी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समन पाने वाले अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनमें एक अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच एजेंसी कथित तौर पर आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों और चैट की पड़ताल कर रही है।

क्या है बिहार का रिशु श्री टेंडर घोटाला ?

यह मामला ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री और उसकी कंपनी रिलायबल इन्फ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी पर सरकारी टेंडर हासिल करने में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप हैं। मामले में वर्ष 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद विशेष निगरानी इकाई (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू की। जांच के दौरान ठेकेदार से जुड़े दस्तावेजों, डायरियों और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल की गई।

टेंडर की गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप

जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार, सरकारी विभागों के टेंडर की गोपनीय तकनीकी जानकारी कथित तौर पर पहले ही कुछ लोगों तक पहुंचाई जाती थी। आरोप है कि इस जानकारी का इस्तेमाल टेंडर की शर्तों को अपने पक्ष में कराने और सरकारी ठेके हासिल करने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित नेटवर्क में किन लोगों की क्या भूमिका थी और क्या किसी तरह का वित्तीय लेनदेन हुआ था। इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

दो IAS अधिकारी निलंबित, तीन अधिकारी जेल में

रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में बिहार सरकार योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा को निलंबित कर चुकी है। वहीं विशेष निगरानी इकाई की कार्रवाई में वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, मुख्य अभियंता तारिणी दास और कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जून 2026 में SVU ने सात प्रमुख आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। अब ED की जांच में कथित संपर्कों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी हलचल

15 अक्टूबर 2026 को पटना हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद इस मामले ने फिर से गति पकड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले लोगों की पहचान और जांच की दिशा को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामले में जांच का दायरा बढ़ने और सात IAS अधिकारियों को समन जारी किए जाने की खबर सामने आई। अब पूछताछ के जरिए कथित टेंडर नेटवर्क की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की संभावित भूमिका स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी।

आगे क्या होगा ?

ED की पूछताछ में अधिकारियों से टेंडर प्रक्रिया, संबंधित लोगों से कथित संपर्क और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के बारे में सवाल किए जा सकते हैं। अब जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।