पटना, 17 अक्टूबर 2026 : बिहार में 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019' के तहत पहला बड़ा ऐतिहासिक फैसला आया है। इस तरह बिहार में तीन तलाक रोधी कानून के तहत सजा सुनाए जाने का पहला मामला सामने आया है। पटना की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने के मामले में बिहटा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के सिमरी गांव निवासी नौशाद अहमद को दोषी ठहराते हुए दो साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को पत्नी पर तेजाब से हमला करने के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया।

तीन तलाक कानून के तहत दोषी करार

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 341 के तहत भी दोषी पाया। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में इस कानून के तहत सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला है। अदालत ने आरोपी को दो साल की कठोर कैद के साथ शिकायतकर्ता को 6,500 रुपये देने का आदेश भी दिया। जुर्माना नहीं भरने पर उसे एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

शादी के 21 साल बाद दिया था तीन तलाक

शिकायतकर्ता रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया की शादी नौशाद अहमद से 9 नवंबर 2001 को हुई थी। दंपती के तीन बच्चे हैं। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2022 में आरोपी ने पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की थी। इसके बाद 5 सितंबर 2022 को उसने पत्नी को तीन तलाक दे दिया। इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद 31 जुलाई 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने तीन तलाक देने और मारपीट से जुड़े आरोपों में आरोपी को दोषी ठहराया, जबकि तेजाब हमले के प्रयास के आरोप से उसे बरी कर दिया।

फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगा बचाव पक्ष

फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील शेखर कुमार ने कहा कि तेजाब हमले के आरोप में उनके मुवक्किल के खिलाफ सबूत नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।